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स्वादिष्‍ट मीठा आम का पना

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गर्मियों के मौसम में सर्वाधिक पसन्द किये जाने वाले पारम्परिक भारतीय  पेय हैं, आम का पना या कैरी का पना , बेल का शर्बत , फालसे का शर्बत नींबू की शिकंजी , तरबूज का रस , ठंडाई आदि.   बाजार में बिकने वाली बनावटी रंग और स्वाद से बनी मीठे पानी की एयरेटेड बोतलें  तो स्वाद और गुणों में पारम्परिक भारतीय पेयों की छाया को भी छू नहीं सकतीं.   नौतपे की गर्मियों में आपके शरीर को लू से बचाने और आपके शरीर के तापमान को स्थिर रखने में आम का पना बहुत सहायक होता है.  इसे बनाना तो बहुत ही आसान है, आईये हम आज आम का पना   बनायें आवश्यक सामग्री-      कच्चे आम - 2 -3 मध्यम  आकार के भुना जीरा पाउडर - 2 छोटी चम्मच काला नमक - स्वादानुसार (2 छोटी चम्मच) काली मिर्च - एक चौथाई छोटी चम्मच चीनी - 100 ग्राम (आधा कप) पोदीना - 20- 30 पत्तिया   विधि -  आम के कच्चे फलों को भून कर अथवा उबालकर उसका गूदा निकाल लेतें है और     इन  उबले हुये आमों को छील कर पल्प निकालने के बजाय कच्चे आम को उबालने से पहले छीलना अधिक सुविधाजनक है. हम आम क...

रावन का सिर..

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बहुत साल पहले एक स्‍कूली छात्र ने रावण का ऐसा चित्र बनाया जिसमें उसके सिर एक के ऊपर एक लगे हुए थे। टीचर पहली बार में अचकचा गया, लेकिन उसने धैर्य रखा और छात्र को बुलाकर पूछा कि क्‍या तुमने रावण की तस्‍वीर नहीं देखी है। छात्र ने कहा देखी है। टीचर ने पूछा कि फिर तुमने सिर एक के ऊपर एक क्‍यों बनाए हैं। तो छात्र का जवाब था कि दाईं और बाईं और सिर बनाने से पहली गलती यह होती कि एक ओर चार सिर बनते और दूसरी तरफ पांच। इससे रावण कभी बैलेंस नहीं बना पाएगा और उसका सिर हमेशा एक ओर झुका रहेगा। व्‍यवहारिक तौर पर यह संभव नहीं है। टीचर खुश हुए। उन्‍होंने छात्र की और परीक्षा ली। पूछा और भी तो कोई विन्‍यास हो सकता था। इस पर छात्र ने कहा कि हां एक और विन्‍यास हो सकता है। अंगूर के गुच्‍छे की तरह। लेकिन इससे रावण हमेशा दृष्टिभ्रम का शिकार रहेगा। ऐसे में सिर ऊपर की ओर होने में न्‍यूनतम नुकसान की आशंका है। वैसे उसे बैलेंस बनाने में अब भी दिक्‍कत आएगी, शरीर की तुलना में अधिक भारी सिरों के बोझ के कारण... 

भरवा करेले ( प्रेशर कुकर मे)

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भरवा करेले ( प्रेशर कुकर मे) सामग्री: करेले- पाव किलोग्राम प्याज- एक बड़ा लहसुन- एक चम्मच( पेस्ट) हरी मिर्च- २-३ लाल मिर्च- आधा चम्मच हल्दी- आधा चम्मच पीसा धना- ४ चम्मच अमचूर पावडर- एक चौथाई चम्मच नमक- स्वादानुसार बेसन- २ चम्मच सौंप- आधी छोटी चम्मच राई- आधी छोटी चम्मच हींग- २ चुटकी चीनी- १ चम्मच गरम मसाला- आधा चम्मच तेल - ३ चम्मच विधि: सबसे पहले करेले के छिलके निकाल कर उन्हे अच्छी तरह साफ कर ले और बीच मे चाकू से चीर कर बीज निकाल ले. प्याज, लहसुन, हरी मिर्च को पीस कर पेस्ट बना ले. अब इस पेस्ट मे लाल मिर्च, हल्दी, पीसा धना, नमक, अमचूर पावडर, चीनी, हींग, सौंप, गरम मसाला, बेसन डाल कर अच्छे से मिक्स कर ले. करेले के बीच मे जहा से चीरा लगाया हे उसमे ये मसाला भर दे. कुछ मसाला बचा कर रख ले. अब कुकर मे तेल डाले और गरम होने पर राई जीरा डाल कर तड़काए. अब उसमे भरे हुए करेले डाल दे. बाकी का मसाला अभी नही डालना हे. प्रेशर कुकर की सिटी निकाल ले और ढक्कन लगा दे. अब धीमी आँच पर २-३ मिनट तक पकाए. थोड़ी देर मे करेले पक कर नरम हो जाएँगे अब कुकर का ढक्कन खोल कर बाकी बचा हुआ मसाला भी मिला दे और बिना ढक्कन लग...

मनुष्य कर्म क्यूँ करता हैं ?

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गीता में श्री कृष्ण ने कहा हैं "प्रकृति से उत्त्पन्न तीनो गुणों द्वारा परवश होकर मनुष्य कर्म करता हैं , वह क्षण मात्र भी बिना कर्म किये नहीं रह सकता ,गुण उस से करा लेते हैं .सो जाने पर भी कर्म बंद नहीं होता . ये तीन गुण हैं सत्व ,रज:और तम आइये जानते हैं इन तीनो गुणों से मनुष्य के शरीर में किस प्रकार के भाव उत्त्पन्न होते हैं ,और कर्म होता हैं :- १.सत्तोगुण :- सत्तोगुण से ज्ञान उत्पन्न होता है (ईश्वरीय अनुभूति का नाम ज्ञान है) ,सत्तोगुण निर्मल है और जीवन में प्रकाश करने वाला है ।  सतोगुण बढ़ने पर इन्द्रियों मे चेतना जाग्रत होने लग जाती है, विवेकशक्ति अपने-आप ही आ जाती है । २.रजोगुण :-रजो गुण से संसारिक वस्तुओं में राग पैदा होता है । संसारिक वस्तुओं में आसक्ति पैदा होती है । इस गुण में कामना बलवती होती है । जिससे जीव कर्म करने को प्रेरित होता है और परिणाम स्वरूप फ़ल भी प्राप्त करता चला जाता है । इस गुण से प्रेरित होकर जीव हमेशा ही "कामना और चाहना" के चक्कर में फ़ंसा रहता है । संसारिक कार्यों के सिवाय और कुछ भी नज़र नही आता । ३.तमोगुण :- प्रमाद, आलस्य व निद्रा इसके फ...

मथुरा जी का जगु पंडा (कविता )

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 बचपन में बालहंस पत्रिका में पढ़ी थी याद आ गई मथुरा जी का जगु पंडा ,५५ लड्डू खाता , लग जावे जब होड़ तो रबड़ी ८ किलो पी जाता , ५२ इंच का तोंद का घेरा , ८ इन्च की चोटी, जिस दिन घर में रोटी खाता ,उस दिन घरवाली रोती .

प्रमाण पत्र -कहानी

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ये कहानी मुझे राजस्थानी भाषा में मुझे मेरे भुवा के लड़के ने काफी साल पहले सुनाई थी ,उसी का हिंदी अनुवाद कर के प्रस्तुत कर रहा हूँ ,उम्मीद हैं आपको पसंद आएगी . एक गीदड़ भूख और प्यास से परेशान भटकते भटकतें जंगल से बाहर एक गाँव में आ गया .गाँव में घुसते ही उसे एक कागज का टुकड़ा दिखाई दिया ,जिस पर थोड़ी बहुत मिठाई लगी हुई थी ,उसको अच्छी तरह से चाटने के बाद भी मीठा होने की वजह से उसने उसको मुंह में दबाये रखा और आगे बढ़ गया . गाँव के कुत्तों को खाने पाने की कोई समस्या नहीं थी इसलिए वे डटकर खाने के बाद दोपहर की गर्मी में आराम से सो रहे थे .गीदड़ एक बार कुत्तो को देख कर रुका ,लेकिन उसने देखा कि कोई कुत्ता उसकी तरफ नहीं देख रहा हैं ,वो हिम्मत करके पुरे गाँव में घूम आया ,किसी ने उसको रोका नहीं ,अच्छी तरह से पेट भर जाने से वो काफी खुश था और अब उसका दिमाग भी चलने लगा . उसने सोचा की ये जो "कागज " का टुकड़ा हैं ये जरुर कोई " प्रमाण पत्र "हैं इसलिए तो कूत्तो ने डर के मारे मेरी तरफ देखा तक नहीं . एसा सोचते सोचते वो अपने भाई बंधुओं के पास लौट आया ,उसे खुश  देखकर दुसरो ने पुछा "भाई ब...

जिज्ञासा नास्तिकता नहीं हैं .

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मैं शुरू से ही जिज्ञासु रहा हूँ ,हर विषय के बारे में जानने की जिज्ञासा रही हैं ,धर्म और अध्यातम के क्षेत्र में मैं जिनसे मिला उसमे से कई लोग मुझे नास्तिक समझते हैं ,जबकि ऐसा हैं नहीं . किसी ने ये नहीं कहा कि तुम प्रश्न करो तब तक करो जब तक शंका दूर न हो ,किसी ने कह दिया जाओ गीता पढ़ लो ,किसी ने कह दिया तुम कुतर्की हो व्यर्थ उलटे सीधे तर्क करते हो ,किसी ने कह दिया अरे तुम तो महापुरुषों की बातों का खंडन करते हो घोर नरक में जाओगे . मैंने उनसे पूछ लिया महाराज कम से कम नरक तक तो पहुंचा दो अगर आप उसके बारे में जानते हो तो:)  जिन लोगो ने वेद ,पुराण और गीता पढने की सलाह दी उन्हें ये बात क्यूँ समझ नहीं आई की ये ग्रन्थ परस्पर संवाद के आधार पर ही बने हैं . गीता तो पूरी तरह से अर्जुन द्वारा किये गए प्रश्नों का कृष्ण द्वारा  उत्तर हैं ,असली समस्या दूसरी हैं ,जो लोग धर्म के ठेकेदार बने हैं उनका खुद का कोई निजी अनुभव आत्मा ,और इश्वर जेसे विषयों में नहीं हैं ,इसलिए वो ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने से घबराते हैं . जो खुद प्रकाशित हो चूका हैं उसी में दुसरो को प्रकाश देने का सामर्थ्य होता हैं . भारत...