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डोले शाह के चूहे या अभिशप्त

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# डोले_शाह_के_चूहे  - पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात या गुजरावाला जिले में पीर डोले शाह की मज़ार है। डोले शाह औरंज़ेब के ज़माने में यहाँ रहा करते थे। पीर साहब का दावा था कि वो बाँझ औरतों को औलाद दे सकते हैं परन्तु उनकी शर्त ये थी कि औरतें अपना पहला बच्चा उनकी दरगाह पर पीर की सेवा के लिए छोड़ जाएंगी। ये परंपरा आज तक चली आ रही है और एक अनुमान के मुताबिक़ पिछले तीन सौ साल में एक लाख से ज़्यादा बच्चे दरगाह की नज़र किये गए। ये बच्चे जो दरगाह पर पल कर बड़े होते थे, इनकी खासियत ये थी की ये अपनी उम्र के हिसाब से शारीरिक तौर पर तो लम्बे-चौड़े, हष्ट-पुष्ट हो जाते थे, परन्तु इनका सर एक-दो साल के बच्चे जितना बड़ा ही रहता था। साथ में ये मंदबुद्धि भी होते थे और दरगाह इनसे भीख मंगवा कर अपनी कमाई करती थी। इसका कारण यह था की यहाँ छोड़े गए साल-दो-साल के मासूम बच्चों को इसी उम्र से सर पर एक लोहे का हेलमेट पहना कर कस दिया जाता था। ये लोहे की टोपी सालों तक बंधी रहती थी। इससे इन बच्चों के सर के बनावट उतनी ही रह जाती थी और साथ में इनका मानसिक विकास भी रुक जाता था। इनको "चूहों" का नाम दिया जाता था और इन्ह...

शिया और सुन्नी

  मौहम्मद - जहर से मरा फ़ातिमा बी ( मौहम्मद की बेटी )— चाकु से हत्या अली ( मौहमम्द का दामाद ) -नमाज पढ़ते मार दिया गया हसन ( मौहम्मद के बड़ा नाती ) - जहर देकर मार दिया गया हुसैन ( मौहम्मद के छोटा नाती ) — कर्बला के मैदान में भूखा प्यासा मार दिया गया ! मारने वाले कौन थें ? सब के सब मुसलमान ही थे । आज भी शिया और सुन्नी के नाम पर क़त्लेआम मचाया हुआ हैं । यही इस्लाम पहचान लो हिन्दुओ ।

जब किस्मत में लिखे हैं घोड़े तो कहाँ से मिलेंगे पकौड़े ...

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वैसे तो अपुन की जिंदगी सात साल पहले तक बड़ी बिंदास टाइप रही ... एकदम झकास मस्तमौला कटपीस भी अपुन को जीवन भर मिलते रहे ... हँसते रहे हंसाते रहे ... एकदम खानाबदोशी जीवन ... जहाँ मिल गई दो वहीँ गिर के गए सो ... कुछ एहि टाइप ... बचपन से किशोर अवस्था तक बस मस्ती भरा जीवन ... बात उन दिनों की जब इण्टर के एग्जाम थे ... तेज गर्मी ... टपकती गंधयुक्त पसीने और थपेड़ों वाली लू वाली गर्मी में रसायन विज्ञान का दूसरा पेपर ... माता राम ने बढ़िया तेज काजल लगे विकास बाबू को दही पेड़े खिला टीका करके पेपर तोड़ने भेज दिया ... सेंटर पर पहुंचे ... सीट तलाशी विराज भी गए ... कुछ ही देर मैं एक लंब तड़ंग मोटा भारी भरकम पर्वताकार भीमकाय काया आगे वाली सीट पर बैठ गई ... मुंह में ठूसम ठूस गुटखा ... साथ में दो बन्दूक लिए पहलवान जो भाईजान को छोड़ने आये थे ... बगल में बन्दूक भी टांगे थे ... दरअसल आगे की बात के पहले बता दूँ हमारे शहर के सबसे अमीर व्यापारी के सपूत थे ... सो मास्साब लोग भी उस भीमकाया की जी हुजूरी में थे ... खैर पेपर बंटा ... शांति से मैं अपना पेपर हल करने लगा ... आगे वाले भैया अपने दोनों जेबों में नकल सामग...

बहादुर बिलावल की बेबाक बकलोली

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साथियों, आज हम एक बड़े ही साहसी युवक के बारे में बताने जा रहे हैं. ये युवक केवल साहसी ही नहीं, अपितु क्रन्तिकारी विचारों वाला तथा महान सेक्युलर भी है. वैसे पाकिस्तान में जन्मा हर व्यक्ति सेक्युलर है, पर इनकी सेक्युलरता महान है! आप सोच रहे होंगे कि हम पाकिस्तान में जन्मे किसी युवक की प्रशंसा क्यों कर रहे हैं. तो जान लीजिये कि ये कोई ऐसी-वैसी शख्सीयत नहीं हैं, आप पाकिस्तान की शान बेनजीर भुट्टो और ज़रदारी भुट्टो के लख्तेजिगर हैं! इस प्रकार ये पाकिस्तन ... अररर मेरा मत्लन स्तान, पकिस्तान के लिए वो हैं जो हमारे लिए राजदुलारे राजकुमार गाँधीकुल शिरोमणि श्री श्री राहुल बाबा हैं. जी हाँ, हम बात कर रहे हैं बिलावल भुट्टो की! तो मित्रों और सहेलियों, आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या किया बिनाबाल ... अररर आई मीन बिलावल भुट्टो जी ने जी हम उनहें महान साहसी कह रहे हैं. तो जान लीजिये साथियों, बिलावल जी पाकिस्तान के लिए कश्मीर को भारत के नापाक चंगुल से छुडवाने की कसम खा चुके हैं. उन्होंने कसम खाई है कि यदि वे ऐसा ना कर पाए तो वो अपना लिंग परिवर्तन अर्थात सेक्स चेंज करवा लेंगे. साथियों, हमारे अति विद्वान प्रश...

आदमी का झूठ, काफी मसहूर

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एक आदमी झूठ बोलने की वजह से काफी मसहूर हो गया .. एक दिन वह किसी दूसरे शहर मे चला गया ... एक अस्सी साल की बूडी औरत को पता चल गया तो डरती हुई आयी और बोली :- बेटा तुम ही दुनिया के सबसे झूठे व्याक्ति हो ना ..... . आदमी बोला :- लोगो की बात को दफा करो , ..... . . मै तो आपको देखकर हैरान रह गया कि इस उम्र मे ये हुस्न ये रंग और ये दिलकसी..... . बूढी औरत :- (शरमाती हुई ) या अल्लाह लोग भी कितने जालिम है अच्छे भले सच्चे इन्सान को झूठा कहते है .. 

साहूकार की आत्मा

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एक बार एक लाला जी ( साहूकार) थे , उनका एकमात्र काम सारे गाँव को परेशान करना और कष्ट पहुंचाना था कभी सूद के नाम पर झूठे मुकद्दमें लिखाते तो कभी किसी और बहाने से कोर्ट कचहरी में गाँव भर को परेशान किये रहते थे ,  बीमार पड़े तो तो गाँव वालों से कहा कि ' हम सोच रहे है कि आप सब को हमने बहुत कष्ट दिए है , अब प्रायश्चित ही कर लें ' ........... ,  आप सब हमें सजा दीजियेगा मरने के बाद हमारी छाती में खूंटा गाड़ दीजियेगा और इस तरह शायद मेरी दुष्टात्मा को शांति मिल जाए ,  लाला जी के मरने पर गाँव वालों ने वैसा ही किया , तुरंत पुलिस आयी कईयों को पकड़ कर ले गयी , क्योंकि लाला जी मरने के पहले पुलिस थाने में रिपोर्ट लिखा गए थे कि गाँव के कुछ लोग हमारी छाती में ' खूँटा ठोक ' कर हमें मारने का प्लान बना रहे है , और इस तरह मरकर भी लाला जी ने गाँव को नहीं छोड़ा , साथियोँ दुष्टात्मायें ऐसी ही होती है ......!! 

“जैसी प्रभु की इच्छा !”

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घने जंगल से गुजरती हुई सड़क के किनारे एक ज्ञानी गुरु अपने चेले के साथ एक साइनबोर्ड लगाकर बैठे हुए थे, जिस पर लिखा था - “ठहरिये … आपका अंत निकट है ! इससे पहले कि बहुत देर हो जाये , रुकिए ! … हम आपका जीवन बचा सकते हैं !” एक कार फर्राटा भरते हुए वहाँ से गुजरी. चेले ने ड्राईवर को बोर्ड पढ़ने के लिए इशारा किया … ड्राईवर ने बोर्ड की ओर देखकर भद्दी सी गाली दी और चेले से यह कहता हुआ निकल गया – “तुम लोग बियाबान जंगल में भी धंधा कर रहे हो ! शर्म आनी चाहिए !” चेले ने असहाय नज़रों से गुरूजी की ओर देखा. गुरूजी बोले – “जैसे प्रभु की इच्छा !” कुछ ही पल बाद कार के ब्रेकों के चीखने की आवाज आई और एक जोरदार धमाका हुआ. कुछ देर बाद एक मिनी-ट्रक निकला. उसका ड्राईवर भी चेले को दुत्कारते हुए बिना रुके आगे चला गया. कुछ ही पल बाद फिर ब्रेकों के चीखने की आवाज़ और फिर धड़ाम …. ! गुरूजी फिर बोले – “जैसी प्रभु की इच्छा !” अब चेले से नहीं रहा गया. बोला – “गुरूजी, प्रभु की इच्छा तो ठीक है पर कैसा रहे यदि हम इस बोर्ड पर सीधे-सीधे लिख दें कि - . . ‘आगे पुलिया टूटी हुई है’ … !!!”

राजा भोज और एक था गंगू तेली और आज ..

एक था राजा भोज और एक था गंगू तेली। राजा भोज यूं तो राजा ही थे। पर जमाने के चलन के हिसाब से कई बिल्डिंगों पर बहुत लोन ले रखे थे। हर महीने लोन की ईएमआई बढ़ जाया करती थी। खजाना खाली सा हो रहा था। बड़ा अद्भुत माहौल था। खजाना खाली हो रहा था, पर मंत्रीगण अमीर हो रहे थे। आंकड़े बता रहे थे कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है। पर सच यह था कि प्रति मंत्री आय बढ़ रही थी। किसी की 768 पर्सेंट सालाना, किसी 8787 पर्सेंट सालाना। समझदार अर्थशास्त्री मंत्रियों को ही देश मान ले रहे थे और डिक्लेयर कर रहे थे कि देश का भारी विकास कर रहा है। रोज-रोज नए घोटाले सामने आ रहे थे। अश्व घोटाला, रथ घोटाला, घृत घोटाला, इन घोटालों में मंत्रीगण दबाकर नोट खा चुके थे या खा रहे थे। अश्व घोटाले में अश्वों की कीमत लेकर खच्चर खरीदे गए थे और बाद में खच्चर देने वाली कंपनी कहने लगी कि सारे जानवर बराबर हैं। घोड़े और खच्चर में भेद कैसा... जानवर-जानवर में कोई भेद नहीं होना चाहिए। रथ घोटाले में यह हुआ कि रथ कागजों पर आए दिखा दिए गए। रथ विभाग का मंत्री सहयोगी दल का था, इसलिए उस वक्त चेकिंग नहीं हुई। बाद में चेकिंग हुई तो पता चला कि रथ आए...

पशु-पक्षी समाज में स्त्री जाति की प्रधानता और सोसल मीडिया

   अक्सर डिस्कवरी देखती  हूँ तो पाती  हूँ कि पशु-पक्षी समाज में स्त्री जाति की प्रधानता होती है। उन लोगों के यहाँ हमारे तरह पुरुषप्रधान समाज नहीं हुआ करते। वैसे हमारे यहाँ भी "पुरुषप्रधान" तो सिर्फ़ कहने को ही है, वास्तविकता से सामना तो शादी के बाद ही होता है कि प्रधान पुरुष है या स्त्री। परंतु शादी से पहले तो सामान्यतः पुरुष ही प्रधान होता है। अगर नहीं है तो भगवान उस दीन प्राणी की आत्मा शान्त रखे!  :) हाँ , तो मैं पशु-पक्षियों की बात कर रही  थी । उनके समाज में स्त्रियों की प्रधानता का अन्दाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उनमें जीवनसाथी का चुनाव भी मादा ही करती है। यही नहीं, मकड़ी की कुछ प्रजातियों में तो मादा समागम के बाद अपने नर साथी को खा भी लेती हैं। क्यों डर गये ना! और नर मादा को रिझाने के लिये ना जाने क्या-क्या किया करते हैं। कोई नर अपने सतरगी पंखों को फ़ैला कर नाच दिखाता है, तो कोई तरह-तरह की आवाजें निकालता है। कोई तरह-तरह के श्रंगार  करता है तो कोई अपने प्रतिद्वंदी को हराता है। घड़ियाल मादा को पाने के लिए अपने प्रतिद्वंदी से घम...

"एक नया व्यंग्य लिखा है, सुनोगे?"

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हमनें एक बेरोज़गार मित्र को पकड़ा और कहा, "एक नया व्यंग्य लिखा है, सुनोगे?" तो बोला, "पहले खाना खिलाओ।" खाना खिलाया तो बोला, "पान खिलाओ।" पान खिलाया तो बोला, "खाना बहुत बढ़िया था उसका मज़ा मिट्टी में मत मिलाओ। अपन ख़ुद ही देश की छाती पर जीते-जागते व्यंग्य हैं हमें व्यंग्य मत सुनाओ जो जन-सेवा के नाम पर ऐश करता रहा और हमें बेरोज़गारी का रोजगार देकर कुर्सी को कैश करता रहा। व्यंग्य उस अफ़सर को सुनाओ जो हिन्दी के प्रचार की डफली बजाता रहा और अपनी औलाद को अंग्रेज़ी का पाठ पढ़ाता रहा। व्यंग्य उस सिपाही को सुनाओ जो भ्रष्टाचार को अपना अधिकार मानता रहा और झूठी गवाही को पुलिस का संस्कार मानता रहा। व्यंग्य उस डॉक्टर को सुनाओ जो पचास रूपये फ़ीस के लेकर मलेरिया को टी०बी० बतलाता रहा और नर्स को अपनी बीबी बतलाता रहा। व्यंग्य उस फ़िल्मकार को सुनाओ जो फ़िल्म में से इल्म घटाता रहा और संस्कृति के कपड़े उतार कर सेंसर को पटाता रहा। व्यंग्य उस सास को सुनाओ जिसने बेटी जैसी बहू को ज्वाला का उपहार दिया और व्यंग्य उस वासना के कीड़े को सुनाओ जिसने अपनी भ...

'मुंह' बना लिया।

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पति पत्नी से, "मेरे संबंधी घर आ रहे हैं, कुछ बना लो"। पत्नी ने 'मुंह' बना लिया। *******************************************************************

ये ही जीवन की सच्चाई है…

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भगवान ने पहले गधे को बनाया – और कहा तुम गधे होगे | तुम सुबह से शाम तक बिना थके काम करोगे | तुम घास खाओगे और तुम्हारे पास अक्ल नहीं होगी और तुम 50 साल जियोगे |” गधा बोला – मै 50 साल नहीं जीना चाहता | ये बहुत ज्यादा है | आप मुझे 20 साल ही दें | भगवान ने कहा तथास्तु………. —————————————— भगवान ने फिर कुत्ते को बनाया – और कहा तुम कुत्ते होगे | तुम घर की रखवाली करोगे | तुम आदमी के दोस्त होगे | तुम वह खाओगे जो आदमी तुम्हे देगा | तुम 30 वर्ष जियोगे |” कुत्ता बोला – मै 30 साल नहीं जीना चाहता | ये बहुत ज्यादा है | आप मुझे 15 साल ही दें | भगवान ने कहा तथास्तु……… —————————————— फिर भगवान ने बन्दर को बनाया – और कहा तुम बन्दर होगे | तुम एक डाली से दूसरी में उछलते कूदते रहोगे | तुम 20 वर्ष जियोगे |” तो बन्दर बोला – मै 20 साल नहीं जीना चाहता | ये बहुत ज्यादा है | आप मुझे 10 साल ही दें | भगवान ने कहा तथास्तु………. —————————————— आखिर में भगवान ने आदमी को बनाया – और कहा तुम आदमी होगे | तुम धरती के सबसे अनोखे जीव होगे| तुम अपनी अकलमंदी से सभी जानवरों के मास्टर होगे| तुम दुनिया पे राज करोगे ...

वो भयानक रात ......

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कृपया कमज़ोर दिल वाले न पढ़ें। यह एक सच्ची घटना है जो पिछले महीने लोनावाला के पास घटी। एक युवक मुम्बई से पुणे अपनी कार से जा रहा था। जब वह घाट के पास पहुँचा तभी अनहोनी घटी। उसकी कार खराब हो गई और वहाँ दूर-दूर तक कोई नज़र भी नहीं आ रहा था। वह किसी कार से पास के कस्बे तक लिफ्ट लेने की आशा में सड़क के किनारे-किनारे चलने लगा। रात अँधेरी और तूफानी थी। पानी झमाझम बरस रहा था। जल्दी ही वह पूरी तरह भीग गया और काँपने लगा। उसे कोई कार नहीं मिली और पानी इतनी तेज बरस रहा था कि कुछ मीटर दूर की चीजें भी नहीं दिखाई दे रही थीं। तभी उसने एक कार को अपनी तरफ आते देखा जो उससे पास आकर धीरे हो गई। लड़के ने आव देखा न ताव, झट से कार का पिछला दरवाजा खोला और अंदर कूद गया। जब वह अपने मददगार को धन्यवाद देने के लिए आगे झुका तो उसके होश उड़ गए क्योंकि ड्राइवर की सीट खाली थी। आगे की सीट खाली और इंजन की आवाज़ न होने के बावजूद भी कार सड़क पर चल रही थी। लड़के ने तभी आगे सड़क पर एक मोड़ देखा। अपनी मौत नजदीक देख वह लड़का जोर-जोर से भगवान को याद करने लगा। तभी खिड़की से एक हाथ आया और उसने कार के स्टीयरिंग व्हील को मोड़ दिया...

"क्या आपके पास ई-मेल पता नही है? शायद आप मजाक कर रहे हो… "

एक बेकार आदमी ने ‘ऑफिस-बॉय’ की जोब केलिए माईक्रोसोफ्ट में अर्जी दी. वहां की एचआर मैनेजर ने उसे देखा और उस बंदे को इंटरव्यु के लिए बुलाया. "अच्छा, तो तुम माईक्रोसोफ्ट में काम करना चाहते हो. तुम्हारा ई-मेल एड्रेस दो. ताकि मैं तुम्हें जवाब भेज सकुं कि कब से तुम्हें काम शुरू करना है." आदमी बोला, "मेरा कोई ई-मेल आईडी नहीं है क्योंकि मेरे पास कम्प्युटर ही नही है." एचआर मैनेजर : "तो फिर मुझे माफ करना. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं कर सकती. अगर तुम्हारे पास ई-मेल पता ही नहीं है तो तुम इस नोकरी के लायक नहीं." वह लड़का बिना कुछ बोले उस ऑफिस से बहार निकल गया. उसकी जेब में सिर्फ 10 रुपए थे. वह बेकार था और काम करके कुछ कमाना चाहता था. अचानक उसके मन में एक विचार आया. वह सीधा सब्जी मार्केट गया और वहां से उसने 10 रुपए के टमाटर खरीद लिए. टमाटर खरीद कर वह उसी मंडी में बैठ गया. दो घंटे में उसके सारे टमाटर बिक गए. अब उसके पास 20 रूपए हो गए थे. इस व्यापार में उसको बहुत मजा आया. फिर तो उसने 20 के टमाटर खरीदे और घर घर जाकर उसको बेचने लगा. धीरे-धीरे उसका व्याप...

लफ्जों का हेर-फेर

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लफ्जों का हेर-फेर पहली तस्वीर : शाम को घर लौटते ही, जैसे ही आप अपनी बीवी को देखें, तुरंत कहें, "आज तो तुम बिलकुल हत्यारिन लग रही हो!" आपको शाम की चाय तो क्या, रात का खाना भी नसीब नहीं होगा! दूसरे तीसरे दिन मिल जाये तो गनीमत होगी. दूसरी तस्वीर : शाम को घर लौटते ही, जैसे ही आप अपनी बीवी को देखें, तुरंत कहें, "आज तो तुम बड़ी क़ातिल लग रही हो, क्या इरादा है?" इस डायलाग के बाद आपको शाम की चाय के साथ गरमा-गर्म पकौड़े और जाने क्या क्या आप अंदाज़ ही लगा सकते है।

उन्होंने कहा था .....

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उन्होंने कहा था .....  आज के युग में गरीब इंसान उसे कहते है, जिसे बिना रिमोट कंट्रोल वाले ब्लैक एंड वाईट टीवी से गुजर करना पड़ता है  | बाबा दूरदर्शनी ... कलम की अहमियत तलवार से ज्यादा होती है , क्योकि तलवार से पैजामे में नाड़ा नहीं डाला जा सकता | तलवार सिंह 'पैजामेवाले'... ऐसे रिश्तेदारों की उम्र सबसे लंबी  होती है , जिनकी करोडो की जायदाद के आप अकेले वारिस होते है | बाबा चिरायु देव ... दुनिया में 'अब' नाम का कोई शब्द नहीं होता |क्योकि जब तक आप 'अब 'कहते है , तब तक वह ' तब ' बनजाता है | ज्ञानी अबतब  सिंह ... आज के दूर में टीवी के विज्ञापन वरदान है क्योकि जब तक विज्ञापन चलते है, बच्चे आपने माता-पिता से थोड़ी - बहुत बाते कर लेते है | बाबा टीवी सिंह ' चैनलवाले '...

पसंद नापसंद

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पसंद - नापसंद : एक व्यक्ति को अपनी पत्नी द्वारा पली गई बिल्ली से सख्त नफरत थी |एक वह उसे अपनी कार में घर से लगभग १० किमी दूर छोड़ आया और घर आकर उसने देखा बिल्ली  वहाँ मौजूद है , जो उससे पहले ही आ गई | अगली बार वह उसे घर से लगभग २०-२५ किमी दूर छोड़ कर आया परन्तु फिर वही हश्र हुआ ,बिल्ली उसके घर पहुँचने से पहले ही आ गई | अंत में वह बिल्ली को ३० किमी दूर ले गया ,वहाँ से ५ किमी पूर्व में फिर ५ किमी दक्षिण में, इस प्रकार खूब घुमा फिर कर छोड़ दिया |एक घंटे बाद उसने फोन करके पत्नी से पूछा ,"क्या बिल्ली घर पर है ?" पत्नी ने कहा ,"हाँ , बिल्ली यही पर है , परन्तु आप क्यों पूछ रहे हो ?" पति देव बोले ,"प्लीज उसे फोन दो , मैं घर आने का रास्ता भूल गया हूँ  |" मित्रों हम किसी को कितना भी न पसंद करे , जीवन में उसकी आवश्यकता कभी भी महसूस हो सकती है !!!!                     So Don't Ignore Anybody !!!