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#सनातन के विरुद्ध षड्यंत्र #बाबा_पकड़_ले_जायेगा_?

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  ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ बाबा शब्द को हमारे यँहा दो प्रकार से समझा जा सकता है। एक पिता के पिता और् एक सम्मानीय संत जिनका कर्तव्य है कि समाज में फैली बुराई आपने तप और् जप से दूर करे। #वैदिक काल में अंग्रेजो के आने से पहले तक साधू, संत, महात्मा, बाबा सम्मान की दृष्टि से देखे जाते थे। गुरुकुल के समय यही साधू बाबा हमारे लिये वैज्ञानिक, शिक्षक और् पथप्रदर्शक के रूप में समाज को बहुत कुछ देकर गए। #आर्यभट्ट , वराहमिहिर, बोधायन, चरक, सुश्रुत, नागार्जुन, चाणक्य, कणाद जैसे सनातनी वैज्ञानिक संत साधू बाबा के रूप में ही रहते थे ना कि कंठ लगोट लगाते थे। इन्ही बाबाओं ने चिकित्सा, खगोल विज्ञान, धातुकर्म, भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणितीय पद्धति, अंतरिक्ष विज्ञान आदि में की गई खोज का आज एक विज्ञान दस प्रतिशत भी नही पा सका है। #आधुनिक विज्ञान अभी ध्वनि की तरंगों का क, ख, ग भी नही समझ पाया है जिसमे एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर ध्वनि तरंगों से बात करते थे। ऐसे ही बाबाओं की खोज से वैदिक विज्ञान का ज्ञान मिला। आधुनिक विज्ञान में मेडिटेशन अभी आरंभिक काल में है, जिसमे सशरीर आप किसी काल में आ जा सकते थे। #पर अंग्रेजो के...

कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्"

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  ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो रामायण की कथा पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे।   जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस अद्भुत रचना के रचने वाले श्री वेंकटाध्वरि का जन्म कांचीपुरम के एक गांव अरसनीपलै में हुआ था। इन्होंने कुल 14 रचनाएं लिखी हैं जिनमें से "राघवयादवीयम्" और "लक्ष्मीसहस्त्रम्" सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। वेंकटाध्वरि श्री वेदांत देशिक के शिष्य थे जिन्होंने इनको शास्त्रों की शिक्षा दी। वेदांत देशिक ने ही श्री रामनुजमाचार्य द्वारा स्थापित रामानुज सम्प्रदाय को वेडगलई गुट के द्वारा आगे बढ़ाया। बचपन में ही दृष्टि दोष से बाधित होने के बावजूद वे मेधावी वकुशाग्र बुद्धि के धनी थे। उन्होंने वेदान्त देशिक का, जिन्हें वेंकटनाथ (1269–1370) के नाम से भी जाना जाता है तथा जिनकी "पादुका सहस्रम्" नामक रचना चित्रकाव्य की अनुपम् भेंट है, अनुयायी बन काव्यशास्त्र में महारत हासिल ...