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सिनेमा की ताकत दिखती फिल्म जय संतोषी माँ

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1975 में आज ही के दिन बॉलीवुड की एक फ़िल्म रिलीज़ हुई थी, नाम था जय संतोषी माँ। 15 लाख की लागत से बनी इस फ़िल्म नें बॉक्स ऑफिस पर उस वक्त के भारत मे पाँच से छः करोड़ रुपए कमाए थे। अपने समय में ये शोले के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी। इस फ़िल्म को देखने के लिए लोग सिनेमा हॉल तक बैलगाड़ियों में मीलों की यात्रा करते थे। दर्शक हॉल की सिनेमा स्क्रीन पर फूल औऱ सिक्के फेंकते थे। कई सारे थिएटर, जहां ये फ़िल्म लगी थी, मन्दिर कहलाये जाने लगे थे। जैसे शारदा टॉकीज को शारदा मन्दिर कहा जाने लगा था औऱ बन्द होने तक इस सिनेमा हॉल का नाम शारदा टॉकीज ही रहा। फ़िल्म देखने आने वाले लोग थिएटर के बाहर जूते चप्पल उतारते थे। उस वक्त के कई छोटे सिनेमा हॉल के मालिको नें पैसे कमाने के लिए थिएटर के बार दान पेटियाँ तक रखवा दी थी। दिलचस्प बात ये है कि सन 1975 में जब ये फ़िल्म रिलीज़ हुई थी तो उससे पहले ज्यादातर लोगों ने इस देवी के बारे में सुना तक नहीं था। सन्तोषी माता का जिक्र पुराणों में कहीं भी नहीं है। सन्तोषी माता दरअसल भारत के कुछ गांवों में पूजी जाने वाली ग्राम देवी थी जिनकी मान्यता रोगों के ...

अध्यातम और धर्म में क्या फर्क हैं ?

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दिलीप कुमार सोनी मेरे अनुसार अध्यातम और धर्म का मुख्य अंतर ये हैं अध्यातम :-अपनी आत्मा का अध्ययन करना ,और प्राप्त हुवे अनुभव के आधार पर अपने जीवन ,दर्शन और सोच को विकसित करना । धर्म :- किसी दुसरे के द्वारा स्थापित विचारो को मजबूती देने के लिए अपनी सोच को सीमित करना ,गलत लगते हुवे भी उस कार्य का समर्थन करना क्यूँ की धर्म ये कहता हैं । मेरे विचार से मनुष्य को अध्यात्मिक होना चाहिए ,धार्मिक होना या न होना उसकी अपनी पसंद हैं । अध्यात्मिक होने का सबसे बड़ा फायदा ये हैं कि ये आपको उन प्रपंचो सेबचाये रखता हैं जो धार्मिक लोग करते रहते हैं बिना किसी कारणवश ,अध्यातम से आप बिना किसी पूर्वाग्रह के मानवता की सेवा कर सकते हैं  धर्म आपको इसकी इजाजत कभी  नही देता  ,मैं नास्तिक नहीं हूँ पर क्यूँ की अभी मेने इश्वर को देखा या प्राप्त नहीं किया हे इसलिए ये भी नहीं कहूँगा की जो कुछ लोग कह रहे हे या कहते आये वो सत्य हैं या पूर्णतया असत्य हैं ,मेने भी धर्म के अनुसार जीने का थोडा प्रयास किया और उस से जो अनुभव हुवा उसने मेरा रुख अध्यातम की और मोड़ दिया ,पर अभी भी मैं विज्ञानं के पक्ष में ज्यादा हू...