Posts

अदालत का झंझट - लघुकथा - Hindi Short Story

Image
‪#‎ अदालत‬  की झंझट से बचने का एक अनुभव आपसे 'शेयर' करना चाहता हूँ.... अब से 19 वर्ष पूर्व हमारी होटल से जुड़ी एक दूकान 2500/- प्रति माह के हिसाब से किराये पर मेरे पिता जी ने उठाई थी. लिखित शर्त थी कि हर तीन वर्ष में 10% किराया बढ़ाया जाएगा. 15 वर्ष में यह किराया बढ़ते-बढ़ते 3660/- मासिक हो गया, मैंने किराएदार से किराया 'रिव्यू' करने का अनुरोध किया क्योंकि उस दूकान का तात्कालीन प्रचलित किराया 30 से 35 हजार रुपए प्रति माह हो चुका था, लगभग दस गुना अधिक.किराएदार ने उचित तर्क दिया  कि अनुबंध के हिसाब से हर तीन वर्ष में किराया बढ़ाया जा रहा है, वही मिलेगा। इस प्रकार उन्होंने 'रिव्यू' करने से इंकार कर दिया। मैंने उनसे दूकान खाली करने का अनुरोध किया, उन्होंने दूकान खाली करने से भी इंकार कर दिया और मुझसे कहा- 'जैसा बन सके, करवा लो।' दूकान खाली करवाने के जो आजकल तरीके चल रहे हैं, वे मेरे स्वभाव के अनुरूप नहीं थे लेकिन एक तरीका सज्जनता वाला बचा था, अदालत में दूकान खाली करने के लिए मुकदमा दायर करना. मैंने अपने वकील मित्र  शर्मा से चर्चा की तो उन्होंने कहा- 'दूकान खा...

विश्व के पहले शल्य चिकित्सक - आचार्य सुश्रुत

Image
विश्व के पहले शल्य चिकित्सक - आचार्य सुश्रुत || शल्य चिकित्सा के जनक: सुश्रुत सुश्रुत प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक थे। उनको शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है।  शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के पितामह और 'सुश्रुत संहिता' के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व में काशी में हुआ था। इन्होंने धन्वन्तरि से शिक्षा प्राप्त की। सुश्रुत संहिता को भारतीय चिकित्सा पद्धति में विशेष स्थान प्राप्त है। (सुश्रुत संहिता में सुश्रुत को विश्वामित्र का पुत्र कहा है। विश्वामित्र से कौन से विश्वामित्र अभिप्रेत हैं, यह स्पष्ट नहीं। सुश्रुत ने काशीपति दिवोदास से शल्यतंत्र का उपदेश प्राप्त किया था। काशीपति दिवोदास का समय ईसा पूर्व की दूसरी या तीसरी शती संभावित है। सुश्रुत के सहपाठी औपधेनव, वैतरणी आदि अनेक छात्र थे सुश्रुत का नाम नावनीतक में भी आता है अष्टांगसंग्रह में सुश्रुत का जो मत उद्धृत किया गया है;।। वह मत सुश्रुत संहिता में नहीं मिलता, इससे अनुमान होता है कि सुश्रुत संहिता के सिवाय दूसरी भी कोई संहिता सुश्रुत के नाम से प्रसिद्ध थी सुश्रुत के नाम पर आयुर्वेद भी प...

रसायन शास्त्र और धातु विज्ञान के प्रणेता - नागार्जुन

Image
रसायन-धातु कर्म विज्ञान के प्रणेता - नागार्जुन। रसायन विज्ञान और सुपर धातुशोधन के जादूगर - नागार्जुन सनातन कालीन विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में रसायन एवं धातु कर्म विज्ञान के सन्दर्भ में नागार्जुन का नाम अमर है ... ये महान गुणों के धनी रसायनविज्ञ इतने प्रतिभाशाली थे की इन्होने विभिन्न धातुओं को सोने (गोल्ड) में बदलने की विधि का वर्णन किया था। एवं इसका सफलतापूर्वक प्रदर्शन भी किया था। इनकी जन्म तिथि एवं जन्मस्थान के विषय में अलग-अलग मत हैं। एक मत के अनुसार इनका जन्म द्वितीय शताब्दी में हुआ था। अन्य मतानुसार नागार्जुन का जन्म सन् 9 31 में गुजरात में सोमनाथ के निकट दैहक नामक किले में हुआ था, रसायन शास्त्र एक प्रयोगात्मक विज्ञान है। खनिजों, पौधों, कृषिधान्य आदि के द्वारा विविध वस्तुओं का उत्पादन, विभिन्न धातुओं का निर्माण व परस्पर परिवर्तन तथा स्वास्थ्य की दृष्टि में आवश्यक औषधियों का निर्माण इसके द्वारा होता है। नागार्जुन ने रसायन शास्त्र और धातु विज्ञान पर बहुत शोध कार्य किया। रसायन शास्त्र पर इन्होंने कई पुस्तकों की रचना की जिनमें 'रस रत्नाकर' और 'रसेन्द्र मंगल' बहुत प्रसिद...

महर्षि पाणिनि

Image
महर्षि पाणिनि - महर्षि पाणिनी महर्षि पाणिनि के प्राचीन प्रोग्रामिंग बारे में बताने पूर्व में आज की कंप्यूटर प्रोग्रामिंग किस प्रकार कार्य करती है इसके बारे में कुछ बताना चाहूँगी  आज की कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाएँ जैसे सी, सी ++, जावा आदि में प्रोग्रामिंग हाई लेवल लैंग्वेज (उच्च स्तर की भाषा) में लिखे जाते है जो अंग्रेजी के सामान ही होती है | इसे कंप्यूटर की गणना सम्बन्धी व्याख्या (संगणना के सिद्धांत) जिसमे प्रोग्रामिंग के सिंटेक्स आदि का वर्णन होता है, के द्वारा लो लेवल लैंग्वेज (कम स्तर की भाषा) जो विशेष प्रकार का कोड होता है जिसे न्यूमोनिक कहा जाता है जैसे जोड़ के लिए ADD, गुना के लिए एमयूएल आदि में परिवर्तित किये जाते है | तथा इस प्रकार प्राप्त कोड को प्रोसेसर द्वारा द्विआधारी भाषा (बाइनरी भाषा: 0101) में परिवर्तित कर क्रियान्वित किया जाता है | संगणना पर की इस प्रकार पूरा कंप्यूटर जगत थ्योरी निर्भर करता है | इसी संगणना पर महर्षि पाणिनि (लगभग 500 ई पू) ने एक पूरा ग्रन्थ लिखा था महर्षि पाणिनि संस्कृत भाषा के सबसे बड़े व्याकरण विज्ञानी थे | इनका जन्म उत्तर पश्चिम भारत के गांधार मे...

भगवान शिव के 2 नहीं 6 पुत्र थे॥

Image
हम सभी भगवान् शिव और पार्वती के दो पुत्र कार्तिक और गणेश की ही कथा सुनते आये हैं।  लेकिन शिव और पार्वती के विवाह और उनसे होने वाले पुत्र के पीछे भी रोचक कहानी हैं।  हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान् विष्णु का विवाह ब्रह्म देव के पुत्र भृगु की पुत्री लक्ष्मी से हुआ था. वहीँ ब्रह्मा के दुसरे पुत्र दक्ष की पुत्री सती का विवाह भगवान् शिव से हुआ था. लेकिन सती ने आग में कूद कर स्वयं को भस्म कर लिया था।  तो सवाल ये है कि शिव के पुत्र कैसे हुए? सती की मृत्यु के बाद सती ने अपना दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय के यहाँ उमा के रूप में लिया था, जिससे भगवान शिव का विवाह हुआ और हिमालय की पुत्री उमा ही ‘पार्वती’ के नाम से जानी गयी. शिव पार्वती के विवाह के बाद उनका गृहस्थ जीवन शुरू हुआ और उन्हें पुत्र प्राप्त हुए।  1. गणेश- भगवान् गणेश के जन्म के पीछे की एक कहानी तो हम सब ने सुनी हैं कि माता पार्वती ने अपने उपटन और चन्दन के मिश्रण से गणेश की उत्पत्ति की और उसके बाद स्नान करने गयी थी।  माता पार्वती ने गणेश को यह आदेश दिया था, कि स्नान करते तक वह किसी को घर में प्रवेश न करने दे. कुछ दे...

सुआटा या नौरत या टेसू और झैंझी या झाँझी बुन्देलखण्डी लोक सांस्कृतिक परम्परा

Image
बुन्देलखण्ड में कुँवारी लड़कियों द्वारा खेला जाने वाला सुआटा अब लुप्त होता जा रहा हैं.टेसू या सुआटा की प्रतिमा या चित्र बनाकर सूर्योदय से पूर्व रंगोली बनाकर नवरात्रि की अष्टमी तक गीत गाते हुए कुवांरी लड़कियां सुआटा खेलती हैं। बालिकाएँ झाँझी, मिट्टी की छेददार हाँडी- जिसमें दिया जलता रहता है, लेकर एक घर से दूसरे घर फेरा करती हैं, झाँझी के गीत गाती हैं और पैसे माँगती हैं। ये गीत कथा की दृष्टि से अद्भुत, किन्तु मनोरंजक होते हैं। क्वार के महीने में शारदीय नवरात्र के अवसर पर लड़के टेसू के गीत गाते हैं और लड़कियाँ झाँझी के गीत गाती हैं। मुझे लगता है, दसवीं शताब्दी से शुरू हुआ सुआटा उस समय उठल पथल और बाहरी आक्रमणकारियों द्वारा वलात कन्याओं के अपरहण के डर से शुरू हुआ। जिसमें सुआटा (आक्रमणकारियों) की आराधना है, साथ ही सुआटा को खत्म करने वाली देवी (हिमानचलजू की कुँवर) की आराधना भी हैं। अष्टमी की रात्रि झिंझरी (छेदवाला मटका जिसमें जलते दिये की रोशनी फेलती हैं) लेकर घर - घर रोशनी फैलाने की चेष्टा करते हुए गाती हैं। "पूँछत-पूँछत आये हैं नारे सुआटा, कौन बड़े जू की पौर सुआ " घर से जब गृहणी न...

"एक पुड़िया जहर" ~~~~~~~~~~

Image
अमावस के गहन शाम की धुंधली वेला है, रात से ठीक पूर्व की। बड़ी मुश्किल से कुछ फर्लांग आगे तक ही दृष्टि जा पा रही है। सूर्य कब का डूब चुका है और अंधकार अपनी चादर फैलाने को आतातुर है। आसमान, जिसपर कभी भी कालिमा हावी हो सकती है, बड़ी ही निर्लज्जतापूर्वक निर्वस्त्र है और बेहद झीना-सा पीलापन लिये हुये है। कहीं-कहीं छिट-पुट लालिमा बिखरी हुई है। मानो किसी चित्रकार ने कागज के महीन से पीत-श्याम कैनवास पर कुछ बूँदें रक्त की छींट दी हों! या मानो काली आँखों के हल्के से पीलेपन के बीच कोई अभागा खून के आँसू रो रहा हो! आने वाले इस अंधकार के वशीभूत होकर विराट आसमान का नीलाभ-वर्ण भी उसका साथ छोड़ चुका है। क्षितिज पर यदा-कदा ध्वनिहीन बिजली चमक रही है। वातावरण में एक अजीब सी बेचैन कर देने वाली उमस व्याप्त है। पेड़ों पर इस वक्त नियमित चहचहाने वाले पंछी भी ना जाने किस अनजान भय से आक्रान्त होकर आज मूक हैं। मानो उनका शोर भी वातावरण की उसी शून्यता में समा गया हो! पेड़ भी काफी गुमसुम हैं... काफी स्थिर और अचल... एक-एक रेशा जड़ है आज! काफी दूर से २-४ कुत्तों के रोने की धीमी आवाजें आ रही हैं। बहुत दूर किसी...