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सलीम अनारकली और अकबर या अकबर अनारकली और सलीम?: 20वी शताब्दी की कल्पना, 16वी शताब्दी का कलुषित सत्य?

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सलीम अनारकली और अकबर या अकबर अनारकली और सलीम?: 20वी शताब्दी की कल्पना, 16वी शताब्दी का कलुषित सत्य? *********************************************** आज सलीम अनारकली, एक मुगल शहजादे सलीम, जो बाद में बादशाह जहांगीर बना और महल की बांदी अनारकली के मुहब्बत की कहानी की कहानी कौन नही जानता है? ये मुहब्बत ऐसी थी की अनारकली के लिये सलीम ने मुगल बादशाह अकबर के विरुद्ध विद्रोह तक कर दिया था और उसकी कीमत अनारकली ने दीवार में चुनवा कर दी थी। यह एक और बात है कि अकबर बड़ा महान और न्यायप्रिय था, उसने अनारकली की माँ को दिये वचन की लाज रखते हुये अनारकली को चोर रास्ते से जिंदा निकलवा दिया था। आज भारत की कॉकटेल पीढ़ी के लिये यही इतिहास है जो 1962 में के. आसिफ की फ़िल्म 'मुगल-ए-आजम' द्वारा स्थापित किया गया था। यह एक ऐसा इतिहास है, जो खुद इतिहास में नही है। इस अनारकली का जिक्र न अकबर के शासनकाल पर लिखित अबुल फजल की 'अकबरनामा' में है और न जहांगीर की 'ताज़ाक़-ए-जहाँगीरी' में है, जो उसके 1605 से 1622 के शासनकाल का वर्णन करती है। फिर सवाल यह पैदा होता है कि यह के. आसिफ की अनारकली आयी कहाँ से औ...

शिव और शक्ति दो त्रिभुज मिल के बने षटकोण

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यहूदियों का रिलीजियस सिंबल 'सिक्स पॉइंटेड स्टार'! .. हिंदी में बोले तो 'षटकोण' ! .. यहूदी लोग इसे 'स्टार ऑफ डेविड' कहते है।और पूरी दुनिया में भी अब ये इसी नाम से जाना जाता है। डेविड यूनाइटेड किंगडम ऑफ इजरायल एंड जुडाह का सेकंड किंग होता है। इनका शासनकाल 1010-970 BCE होता है। ये यहूदियों के लिए बहुत ही यशस्वी और प्रतापी राजा होता है। और इन्हीं के नाम ये 'सिक्स पॉइंटेड स्टार' का नाम रखा गया है याने कि 'स्टार ऑफ डेविड'। इस स्टार का यहूदियों में चलन 3री से 4थी शताब्दी में ज्यादा होने लगा। इससे पहले बहुत कम था। लेकिन जब ये आम व्यवहार में आया तो इनका नाम किंग डेविड पे रखा गया। और आज हालत ये है कि इसे 'स्टार ऑफ डेविड' के ही नाम से जाना जाता है। और इसका महत्व कुछ इस प्रकार है कि ये 'स्टार ऑफ डेविड' इजरायल के राष्ट्रीय झंडे में भी स्थान पाया हुआ है। लेकिन इस डेविड के स्टार की जरा और खोजबीन करते हैं। डेविड तो हुए ईसा पूर्व 1000 के आस पास के। लेकिन क्या इनके पूर्व इस स्टार का चलन अन्य जगह नहीं था ?? किन्हीं अन्य सभ्यता में इसकी मौजूदगी नहीं ...

अंतरिक्ष की आवाजो की वास्तविकता

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400 ईसा पूर्व डेमोक्रेटिस ने एक सिद्धान्त दिया कि सभी वस्तुएँ एटम से बनी है और एटम ब्रह्मांड में पाया जाने वाला सबसे छोटा तत्व है इसे तोड़ कर और छोटा नही किया जा सकता... सर अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने आगे चलकर इस थ्योरी को सही साबित किया... सन 1807 में जे जे थॉमसन ने अणु में इलेक्ट्रॉन के होने के सबूत जुटाए और फिर न्यूक्लियस की खोज के बाद विज्ञान ने हमे बताया की न्यूक्लियस भी प्रोटोन और न्यूट्रॉन से बने होते है... ये अंतिम थ्योरी थी, विज्ञान ने ये दावा किया कि इन इकाइयों को इससे ज्यादा नही तोड़ा जा सकता लेकिन फिर 1970 में क्वार्क्स की खोज हुई और विज्ञान ने हमे फिर बताया कि न्यूट्रॉन और प्रोटॉन क्वार्क्स के संयोजन से बने होते है... फिर पृथ्वी पर फोर्सेज ऑफ नेचर की खोज करने वाले माइकल फैराडे ने ब्रह्मांड की फील्ड की खोज की... ब्रह्मांड की फील्ड को क्वांटम फील्ड कहा गया... और क्वांटम फिज़िसियस्ट ने एक नई थ्योरी पेश की... एटम, न्यूक्लियस, प्रोटोन, न्यूट्रॉन और इनके सब-पार्टिकल असल में सॉलिड पार्टिकल है ही नही, बल्कि ये सब वेव यानी तरंग है जो बनते है क्वांटम फील्ड में होने वाले वाइब्रेशन की वजह से......

Qutub Minar Facts- विष्णु ध्वज हैं क़ुतुब मीनार का असली नाम

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Truth Of Qutub Minar - क़ुतुब मीनार का निर्माण हिंदू राजाओं ने करवाया था  इतिहास के पन्नों में दर्ज महान सरंचना जो कि आज क़ुतुब मीनार -Qutub Minar या Kutub Minar के नाम से जानी जाती हैं इसका निर्माण मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन द्वारा नहीं किया गया था .नीचे दिए कुछ तथ्यों पर नजर डालिए और खुद फैसला कीजिये . 1191 में मोहम्मद गौरी ने दिल्ली पर आक्रमण किया, तराइन के मैदान में पृथ्वी राज चौहान के साथ युद्ध में गौरी बुरी तरह पराजित हुआ, 1192 में गौरी ने दुबारा आक्रमण में पृथ्वीराज को हरा दिया, कुतुबुद्दीन, गौरी का सेनापति था. 1206 में गौरी ने कुतुबुद्दीन को अपना नायब नियुक्त किया और जब 1206 में मोहम्मद गौरी की मृत्यु हुई वह गद्दी पर बैठा. अनेक विरोधियों को समाप्त करने में उसे लाहौर में ही दो वर्ष लग गए. 1210 लाहौर में पोलो खेलते हुए घोड़े से गिरकर उसकी मौत हो गयी.अब इतिहास के पन्नों में लिख दिया गया है कि कुतुबुद्दीन ने क़ुतुब मीनार, कुवैतुल इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद भी बनवाई. अब कुछ प्रश्न ……. अब कुतुबुद्दीन ने क़ुतुब मीनार बनाई, लेकिन कब ? क्या कुतुबुद्दीन ने ...

रक्षाबंधन -Heart Touching Short Story On Raksha Bandhan

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पिछले तीन-चार या शायद उस से भी अधिक महीनों से भैया ने मुझे फोन नहीं किया था. गाहे बगाहे मैं जब फोन करती, भैया से बातें हो नहीं पाती. भाभी अलबत्ता उनकी व्यस्तता का रोना रोती रहतीं. रक्षाबंधन आ रहा था, मुझे बार बार अपनी बचपन वाली 'राखी' याद आ रही थी. कितना बड़ा त्यौहार होता था तब ये. रक्षा बंधन के लिए मम्मी हमदोनों भाई-बहन के लिए नए कपडे खरीदती. बाज़ार में घूम घूम भैया की कलाई के लिए सबसे स्पेशल राखी खरीदना. सुनहरी किरणों से सजी, वो मोटे से स्पंज नुमा फूल पर 'मेरे भैया' लिखा होना. समय के साथ राखी के स्वरुप और डिज़ाइन में आज बहुत फर्क आ गया है. अब तो पहले अधिक सुंदर और डिज़ाइनर राखियाँ बाज़ार में उपलब्ध हैं. पर दिल उस पल के लिए तडपता है जब भाई को सामने बिठा मैं खुद राखी बांधती थी. तिलक लगाती, आरती उतराती और मिठाई खिलाती. मम्मी पूरे साल हम दोनों भाई-बहन को एक सा जेब खर्च देती थी, जिसे हम खर्च ना कर गुल्लक में डाल देतें. पर रक्षा बंधन के बाद मेरे गुल्लक में भैया से अधिक पैसे हो जातें. भैया कभी कभी खीजता हुआ बोलता भी था, "सिर्फ मैं ही क्यूँ पैसे दूँ, ये भी दे मुझे. पांच रूपये...

अदालत का झंझट - लघुकथा - Hindi Short Story

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‪#‎ अदालत‬  की झंझट से बचने का एक अनुभव आपसे 'शेयर' करना चाहता हूँ.... अब से 19 वर्ष पूर्व हमारी होटल से जुड़ी एक दूकान 2500/- प्रति माह के हिसाब से किराये पर मेरे पिता जी ने उठाई थी. लिखित शर्त थी कि हर तीन वर्ष में 10% किराया बढ़ाया जाएगा. 15 वर्ष में यह किराया बढ़ते-बढ़ते 3660/- मासिक हो गया, मैंने किराएदार से किराया 'रिव्यू' करने का अनुरोध किया क्योंकि उस दूकान का तात्कालीन प्रचलित किराया 30 से 35 हजार रुपए प्रति माह हो चुका था, लगभग दस गुना अधिक.किराएदार ने उचित तर्क दिया  कि अनुबंध के हिसाब से हर तीन वर्ष में किराया बढ़ाया जा रहा है, वही मिलेगा। इस प्रकार उन्होंने 'रिव्यू' करने से इंकार कर दिया। मैंने उनसे दूकान खाली करने का अनुरोध किया, उन्होंने दूकान खाली करने से भी इंकार कर दिया और मुझसे कहा- 'जैसा बन सके, करवा लो।' दूकान खाली करवाने के जो आजकल तरीके चल रहे हैं, वे मेरे स्वभाव के अनुरूप नहीं थे लेकिन एक तरीका सज्जनता वाला बचा था, अदालत में दूकान खाली करने के लिए मुकदमा दायर करना. मैंने अपने वकील मित्र  शर्मा से चर्चा की तो उन्होंने कहा- 'दूकान खा...

विश्व के पहले शल्य चिकित्सक - आचार्य सुश्रुत

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विश्व के पहले शल्य चिकित्सक - आचार्य सुश्रुत || शल्य चिकित्सा के जनक: सुश्रुत सुश्रुत प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक थे। उनको शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है।  शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के पितामह और 'सुश्रुत संहिता' के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व में काशी में हुआ था। इन्होंने धन्वन्तरि से शिक्षा प्राप्त की। सुश्रुत संहिता को भारतीय चिकित्सा पद्धति में विशेष स्थान प्राप्त है। (सुश्रुत संहिता में सुश्रुत को विश्वामित्र का पुत्र कहा है। विश्वामित्र से कौन से विश्वामित्र अभिप्रेत हैं, यह स्पष्ट नहीं। सुश्रुत ने काशीपति दिवोदास से शल्यतंत्र का उपदेश प्राप्त किया था। काशीपति दिवोदास का समय ईसा पूर्व की दूसरी या तीसरी शती संभावित है। सुश्रुत के सहपाठी औपधेनव, वैतरणी आदि अनेक छात्र थे सुश्रुत का नाम नावनीतक में भी आता है अष्टांगसंग्रह में सुश्रुत का जो मत उद्धृत किया गया है;।। वह मत सुश्रुत संहिता में नहीं मिलता, इससे अनुमान होता है कि सुश्रुत संहिता के सिवाय दूसरी भी कोई संहिता सुश्रुत के नाम से प्रसिद्ध थी सुश्रुत के नाम पर आयुर्वेद भी प...