"दर्द सीने में बहुत गहरा हैं"


दर्द सीने में बहुत गहरा हैं

हरपल उसपर तन्हाइयो का पहरा है



प्यार/इश्क/महोब्बत सब करके देखा उसने
फिर जाना यहा हर शख्स ही बहरा है



अब तो परिंदे भी आजादी से घुम नही सकते
आकाश में भी अब झख्मी हवाओ का पहरा है

दरख्त भी उगते है यहा ये सोच सोचकर
जो सर उठायेगा वही पहले कलम होगा

दह्सत्गार्दो का आज हर मोड़ पर बसेरा है

वह जो चलती है सगीन राहो पर कुमारी
क्या जाने नजरो का वो मिजाज तुम्हारी

फिर भी हालातो से लड़ते लड़ते
मंजिल पाना सीख गयी अब हर नारी ।।
                                                                                  #रुचिर अक्षर

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