चोर और पुजारी को मिला अपने कर्मो का फल
दो आदमी जंगल के किनारे मिलते है जिन्हें जंगल से होकर जाना था ..उनमे एक पुजारी और एक चोर था ..रास्ते में पुजारी की टांग में जंगली काँटा चुभा..बहुत खून बहा और तेज दर्द होने लगा... खैर, थोडा आगे चलने पर चोर को एक सोने का सिक्का मिला..चोर बहुत खुश हुआ..ये देखकर पुजारी का क्रोध फूट पडा..उसने आसमान की ओर देखा और भगवान से पूछा "हे भगवान, मैंने पूरी उमर आपकी देखभाल की उसके बदले मुझे इतनी तकलीफ दी और इस चोर ने कभी आपकी पूजा नही की, हमेशा दूसरो को दुःख दिया और आपने उसे सोने का सिक्का दिया...ये अन्याय है...!भगवान ने उत्तर दिया; हे वत्स, तुम पिछले जन्म में बहुत क्रूर इनसान थे, तुमने बहुत ईंसानो की जान ली..आज तुम्हारी एक टांग पूरी तरह से कटनी थी लेकिन इस जन्म के अच्छे कर्मो की वजह से तुम्हे सिर्फ़ एक काँटा चुभा..! और वो चोर पिछले जन्म में एक भला इनसान था, उसने गरीबों की सेवा की, भूखों को भोजन कराया..उसे आज सोने के सिक्कों से भरा सन्दूक मिलना था लेकिन इस जन्म के कुकर्मो की वजह से उसे सिर्फ़ एक सोने का सिक्का मिला..!
अब बताओ कि दुर्भाग्यशाली कौन...।।
BILKUL SATYA HAI ..DHANYAVAD POORNIMA JI
ReplyDeleteधन्यवाद स्वरुप जी ..
Deletekarmon ka fal to jarur hi milta hai , bahut achhi kahani ..
ReplyDeleteउत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद उपासना जी ..
Deletebahut achhi kahani hai aur prernadayak bhi
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