सदियाँ बीत जाती हैं, उसे फिर भूल पाने में
!!!!आंसू - आंसू जीवन की मधुशाला है
क्या है बोलो प्रेम, जहर का प्याला है
रोते -रोते खुद ही चुप हो जाते हैं
किससे रूठें, कौन मनाने वाला है!
कभी आँखों के गौहर तो कभी, ज़ज्बात के मोती ......
ना पूंछो क्या नहीं खोया है हमने तुमको पाने में ....
एक पल भी नहीं लगता किसी से दिल लगाने में ...
की सदियाँ बीत जाती हैं, उसे फिर भूल पाने में ...!!
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