भुल्ल्कड़.....हास्य कविता

भुल्ल्कड़~~ प्रितेश पाठक "यावर"

मेरे साथ ये मुसीबत हैं,
मुझे भूलने की आदत हैं|

एक दिन...
नहाकर निकला, बड़े मूड में गुनगुना रहा था,
अखबार उठाया और वो गाना भूल गया|

फिर एक दिन...
दूध वाले को पैसे देने थे, कही भूल न जाऊ सोचकर,
५०० का नोट जेब से निकाला, कही रखकर भूल गया|

कुछ दिन बाद...
एक शाम "मोपासा" पढ़ने का मन किया, चाय बनाकर छत पर ले गया,
कहानी पढते पढते पहली चुस्की ली, पता चला शक्कर भूल गया|

फीकी चाय की चुस्की में,
ज़ायके की तो बात न रही,
पर उस शाम गाना याद आया,
"दिल ढूंडता हैं फिर वही..."
"मोपासा" की कहानी में भी,
फिर दिलचस्प एक मोड आया,
मैंने व्याकुल होकर पन्ना पलटा,
तो ५०० का एक नोट आया,
अफ़सोस फीकी चाय का भी,
तब जताना फ़िज़ूल गया,
एक चुस्की जब मीठी लगी, तो याद आया,
शक्कर डाली तो थी, पर हिलाना भूल गया|

कहता हू न...
मेरे साथ ये मुसीबत हैं,
मुझे भूलने की आदत हैं|                
http://www.tahriir.com/ से साभार
_______________________

Comments

  1. डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"May 7, 2013 at 6:37 PM

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (08-05-2013) मन में टीस तो उठेगी .... एक ख़त तुम्हारे नाम ... बुधरीय चर्चा-1238 ------सार्थक पहलू के साथ में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार.

    ReplyDelete
  3. purnima ji ,किसने लिखी हैं ,आपकी हैं या किसी और की ?

    ReplyDelete
  4. ओके ,मेने source लिंक डाल दिया हैं .

    ReplyDelete
  5. ये मुझे एक ब्लॉग पर मिले पर नाम नज़र नहीं आया ..

    ReplyDelete
  6. हां आपने अच्छा ढूंड निकला ..धन्यवाद

    ReplyDelete
  7. धन्यवाद मयंक जी ..

    ReplyDelete
  8. धन्यवाद ..

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

बीरबल के बुद्दिमान पुत्र ने दिये अकबर के प्रश्नो के उत्तर

समर्पित प्रेमी जहांगीर की वास्तविक निर्मम कथा ..

Qutub Minar Facts- विष्णु ध्वज हैं क़ुतुब मीनार का असली नाम