अध्यातम और धर्म में क्या फर्क हैं ?

दिलीप कुमार सोनी
मेरे अनुसार अध्यातम और धर्म का मुख्य अंतर ये हैं
अध्यातम :-अपनी आत्मा का अध्ययन करना ,और प्राप्त हुवे अनुभव के आधार पर अपने जीवन ,दर्शन और सोच को विकसित करना ।
धर्म :- किसी दुसरे के द्वारा स्थापित विचारो को मजबूती देने के लिए अपनी सोच को सीमित करना ,गलत लगते हुवे भी उस कार्य का समर्थन करना क्यूँ की धर्म ये कहता हैं ।

मेरे विचार से मनुष्य को अध्यात्मिक होना चाहिए ,धार्मिक होना या न होना उसकी अपनी पसंद हैं ।

अध्यात्मिक होने का सबसे बड़ा फायदा ये हैं कि ये आपको उन प्रपंचो सेबचाये रखता हैं जो धार्मिक लोग करते रहते हैं बिना किसी कारणवश ,अध्यातम से आप बिना किसी पूर्वाग्रह के मानवता की सेवा कर सकते हैं  धर्म आपको इसकी इजाजत कभी  नही देता  ,मैं नास्तिक नहीं हूँ पर क्यूँ की अभी मेने इश्वर को देखा या प्राप्त नहीं किया हे इसलिए ये भी नहीं कहूँगा की जो कुछ लोग कह रहे हे या कहते आये वो सत्य हैं या पूर्णतया असत्य हैं ,मेने भी धर्म के अनुसार जीने का थोडा प्रयास किया और उस से जो अनुभव हुवा उसने मेरा रुख अध्यातम की और मोड़ दिया ,पर अभी भी मैं विज्ञानं के पक्ष में ज्यादा हूँ क्यूँ की विज्ञानं जो कहता हैं उसे प्रयोग द्वारा सिद्ध भी करके दिखा देता हैं ।

Comments

  1. सही कहा आपने अध्यात्मिक होना जरूरी है न की अंधविश्वासों से ग्रसित धार्मिक होना.

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  2. right-real truth of nature nd human being ,but science is also not perfct "

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  3. खुद सीख कर करना औरों के लिए बिना किसी स्वार्थ के जिससे खुद को संतोष मिले ... शायद आध्यात्म का ही एक रूप है ... लिखना शुरू किया और इतनी जल्दी इतना सरल और अच्छा लिखा अच्छा लगा ... :-)

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    1. अर्चना जी ,सरल इसलिए की शब्द कम हे मेरे पास :)

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  4. Vigyan me to bada andhvishwash ! Aaj ki theori kal ki nayi khoj ke saath asatya . us par hamara jo itne din vishwash tha vo kya kahlayega ?

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    1. विक्रम जी मैं आपकी बात से कम सहमत हूँ ,विज्ञानं नई थ्योरी को और खंडन को स्वीकार तो करता हैं और जितनी खोज की गई उसे प्रयोग द्वारा सिद्ध करके भी बताता हैं , आपकी बात धर्म और अध्यातम पर दुसरे रूप में लागु होती हैं ,क्यूँ की धर्माचार्य कहते हैं की इश्वर प्राप्ति के लिए अंध श्रद्धा जरुरी हैं ,कम से कम विज्ञानं में आदमी अपने प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र तो हैं ,धर्म के ठेकेदारों की बात का खंडन किया तो "नरक " में जाना पड़ेगा :)

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