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आखिरकार कोई एक विकल्प

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आज एक रिक्शा सुबह से पीएचडी के पानी टंकी के पास लगा है, और वो शायद चालक ही है जो लुंगी और डीले-डाले कमीज में चप्पलों के साथ पैर से खेल रहा है। चेहरे की भाव-भंगिमा बता रही है कि आज उसने अन्न का एक दाना भी नहीं छुआ है। शायद झगड़ा कर के आया होगा, जोरु से? बीड़ी भी शायद आखिरी ही है ये। सुबह से 4-5 पी चुका है। आज कोई भी साथी-संगी नहीं आया है उसके पास उसकी बीड़ी को साझा करने, ना ही आज उसने किसी को टोका भी। रमेशरा एक बार व्यापार मंडल की सवारी लेकर गुजरा तो चिल्लाया कि "क्या कर रहा है हियाँ बैठे, हुआँ तुमरा इतंजार कर रहा है श्याम बाबू, गाँजा पिले हो का? जाओ जल्दी कोर्ट मोरनिंग है।" उसने पूरा अनसुना कर दिया। दो चार मर्तबे इधर उधर देखा तो पाया कि कोई उसकी ओर ताक भी नहीं रहा है। वो फिर मगन है अपने खेल में, तभी बच्चू आया और उसकी सोच रूपी तद्रा को भंग करते हुए झकझोर दिया फिर खींचकर उसे चाय की दुकान पर ले आया। ये उसका पक्का यार है। बच्चू ने पुछा "क्या हुआ है जो? एक भी सवारी नहीं उठा रहे हो आज?" "आज फिर छोटका को उसकी बड़की माय मार-मार के धाग दी है, चुन्निया को कल सांझ के बेला ...

सिकन्दर ने नहीं महाराज पुरु ने सिकन्दर को हराया था ~~

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[ झेलम और चेनाब नदियों के बीच "महाराज पुरु" का राज्य था |  सिकन्दर के साथ  हुई मुठभेड़ में पुरु परास्त हुआ किन्तु सिकन्दर ने उसका प्रदेश उसे लौटा दिया      झा एंड श्रीमाली, पृष्ठ १७१] जो वाक्य आपने ऊपर पढ़ा वो सिविल सेवा की तैयारी के दौरान दुर्भाग्यवश "झा एंड श्रीमाली" जैसे नीच और मुर्ख वामपंथी इतिहासकारों द्वारा लिखित मानक इतिहास है जो हमें बार-बार पढ़ना पढ़ा | व्यक्तिगत तौर पे कहूँ, तो पता नहीं ये कौन से "झा" हैं,, जिन्होंने हम लोगों का नाम खराब किया है | अपनी शौर्य और वीरता के लिए जगत प्रसिद्द "महान राजा पुरु" का इतिहास, सिकन्दर भगौड़े का गुणगान करते हुए महज उपर्युक्त दो वाक्यों में सिमटा दिया गया है,,  और हर बार मैं उसके ("झा एंड श्रीमाली") इन  दो वाक्यों के पास अपनी पेन्सिल और कलम तोड़ कर भड़ास निकालने को बाध्य होती हूँ |  क्योंकि हर बार मुझे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के इतिहासकार "रोबिन लेन फोक्स" के द्वारा सिकन्दर पर लिखित इतिहास की पुस्तक “अलेक्जेंडर द ग्रेट” पर आधारित २००४ में बनी ओलिवर स्टोन की फिल्म “अलेक्जेंडर” मुझे याद आ ज...

क्या मिहिरकुल ही कल्की अवतार है .....

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स्कंदगुप्त के काल में ही हूणों ने कंबोज और गांधार अर्थात बौद्धों के गढ़ संपूर्ण अफगानिस्तान पर अधिकार करके फिर से हिन्दू राज्य को स्थापित कर दिया था। लगभग 450 ईस्वीं में उन्होंने सिन्धु घाटी क्षेत्र को जीत लिया। कुछ समय बाद ही उन्होंने मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान के इलाके भी जीत लिए। 495 ईस्वीं के लगभग हूणों ने तोरमाण के नेतृत्व में गुप्तों से पूर्वी मालवा छीन लिया। एरण, सागर जिले में वराह मूर्ति पर मिले तोरमाण के अभिलेख से इस बात की पुष्टि होती है। जैन ग्रंथ 'कुवयमाल' के अनुसार तोरमाण चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित पवैय्या नगरी से भारत पर शासन करता था। इतिहासकारों के अनुसार पवैय्या नगरी ग्वालियर के पास स्थित थी। तोरमाण के बाद उसका पुत्र मिहिरकुल हूणों का राजा बना। ( मिहिरकुल भारत में एक ऐतिहासिक श्वेत हुण शासक था। ये तोरामन का पुत्र था। तोरामन भारत में हुण शासन के संस्थापक था। मिहिरकुल 510 ई. में गद्दी पर बैठा। संस्कृत में मिहिरकुल का अर्थ है - 'सूर्य के वंश से', अर्थात सूर्यवंशी। मिहिरकुल का प्रबल विरोधी नायक था यशोधर्मन। कुछ काल के लिए अर्थात् 510 ई. में एरण (तत्कालीन...

रानी केतकी की कहानी (इंशा अल्ला खान)

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यह वह कहानी है कि जिसमें हिंदी छुट। और न किसी बोली का मेल है न पुट।। सिर झुकाकर नाक रगड़ता हूँ उस अपने बनानेवाले के सामने जिसने हम सब को बनाया और बात में वह कर दिखाया कि जिसका भेद किसी ने न पाया। आतियाँ जातियाँ जो साँसें हैं, उसके बिन ध्यान यह सब फाँसे हैं। यह कल का पुतला जो अपने उस खेलाड़ी की सुध रक्खे तो खटाई में क्यों पड़े और कड़वा कसैला क्यों हो। उस फल की मिठाई चक्खे जो बड़े से बड़े अगलों ने चक्खी है। देखने को दो आँखें दीं और सुनने के दो कान। नाक भी सब में ऊँची कर दी मरतों को जी दान।। मिट्टी के बासन को इतनी सकत कहाँ जो अपने कुम्हार के करतब कुछ ताड़ सके। सच है, जो बनाया हुआ हो, सो अपने बनानेवालो को क्या सराहे और क्या कहे। यों जिसका जी चाहे, पड़ा बके। सिर से लगा पाँव तक जितने रोंगटे हैं, जो सबके सब बोल उठें और सराहा करें और उतने बरसों उसी ध्यान में रहें जितनी सारी नदियों में रेत और फूल फलियाँ खेत में हैं, तो भी कुछ न हो सके, कराहा करैं। इस सिर झुकाने के साथ ही दिन रात जपता हूँ उस अपने दाता के भेजे हुए प्यारे को जिसके लिये यों कहा है - जो तू न होता तो मैं कुछ न बनाता; और उसका चचेरा भा...

10 दिन मे पासपोर्ट (Passport) बनाने का आसान तरीका (हिन्दी मे)

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मात्र 10 दिन में बन जाएगा आपका PASSPORT, ये है नया तरीका---- आइये, जानते हैं क्या है पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन का प्रॉसेस... स्टेप-1- पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें सबसे पहले पासपोर्ट सेवा पोर्टल की वेबसाइट मे जाने के लिए यहाँ किलिक करे  पर जाएं। पेज पर register now के लिंक पर क्लिक करें। रजिस्टर करें। इसमें अपनी डिटेल्स भरें। इसके बाद आपको ई-मेल आईडी पर लॉगिन आईडी मिल जाएगी। वापस होम पेज पर जाएं। स्टेप-2- लॉगिन करें ई-मेल पर आए लिंक पर क्लिक करके अपने अकाउंट को एक्टिवेट करें। यूजर आईडी भरें और फिर पासवर्ड डालें। अप्लाई फॉर फ्रेश पासपोर्स (Apply For Fresh Passport) या री-इश्यू ऑफ पासपोर्ट लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद दो पार्ट हैं। ऑनलाइन पासपोर्ट आवेदन करने के लिए दूसरे ऑप्शन पर क्लिक करें। स्टेप-3- विकल्प चुनें पहली बार पासपोर्ट आवेदन के लिए अप्लाई फॉर फ्रेश पासपोर्ट (Apply For Fresh Passport) पर क्लिक करें। अप्लाई करने के बाद आपके सामने फॉर्म खुलकर आएंगे। इसमें जानकारी मांगी जाएगी। फॉर्म को सही से भरें। ध्यान रहे कि फॉर्म भरने में गलती न हो, क्योंकि एक बार पासपोर...

गरीब की आग

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उस आदमी का घर जल रहा था। वह अपने परिवार सहित आग बुझाने का प्रयास कर रहा था लेकिन आग प्रचंड थी।बुझने का नाम न लेती थी। ऐसा लगता है जैसे शताब्दियों से लगी आग है, या किसी तेल के कुएं में माचिस लगा दी गई है या कोई ज्वालामुखी फट पड़ा है। आदमी ने अपनी पत्नी से कहा, "इस तरह की आगतोहमनेकभी नहीं देखी थी।" पत्नी बोली, "हां क्योंकि इस तरह की आग तो हमारे पेट में लगा करती है। हम उसे देख नहीं पाते थे।" वे आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे कि दो पढ़े-लिखे वहां आ पहुंचे। आदमी ने उनसे कहा, "भाई हमारी मदद करो।" दोनों ने आग देखी और डर गए। बोले, "देखो, हम बुद्धिजीवी हैं, लेखक हैं, पत्रकार हैं, हम तुम्हारी आग के बारे में जाकर लिखते हैं।" वे दोनों चले गए। कुछ देर बाद वहां एक आदमी और आया। उससे भी इस आदमी ने आग बुझाने की बात कही। वह बोला, "ऐसी आग तो मैंने कभी नहीं देखी… इसको जानने और पता लगाने के लिए शोध करना पड़ेगा। मैं अपनी शोध सामग्री लेकर आता हूं, तब तक तुम ये आग न बुझने देना।"वह चला गया। आदमी और उसका परिवार फिर आग बुझाने में जुट गए। पर आग थी कि काबू में ही न आ...

भूत ने छात्रा को किया प्रेगनेंट, पैदा हुए जुड़वा बच्चे फिर..

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देहरादून। आस्था की नगरी हरिद्वार में एक भूत ने बवाल मचा रखा है। भूत का दिल एक 26 साल की युवती पर आ गया। भूत युवती की ओर इस कदर पागल हुआ कि रात के वक्त युवती के घर पहुंच गया। इतना ही नहीं रात के वक्त भूत ने छात्रा के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए। युवती प्रेगनेंट हुई.. नौ माह बाद उसने जुड़वा बच्चों को जन्म भी दिया। अब भूत बच्चों को लेकर फरार है। यह किस्सा सुनकर सब चकराए हुए हैं। भूत द्वारा प्रेगनेंट किए जाने का दावा करने वाली छात्रा उत्तराखंड की रहने वाली है। युवती की कही एक भी बात पर कोई विश्वास करने को तैयार नहीं है। मामला सामने तब आया जब युवती पुलिस थाने पहुंच गई और पुलिसकर्मियों से चीख-चीख कर अपने बच्चों को खोजने की गुहार लगाने लगी। संबंधित थाने की पुलिस के अनुसार यह युवती पढ़ी-लिखी है और अग्रेंजी फर्राटेदार बोलती है। युवती ने यह भी बताया कि वो इंजीनियरिंग की छात्रा भी है। युवती के पास एक डायरी भी है। पुलिस ने बताया कि युवती ने उसकी एक डायरी भी गुम हो जाने की बात कही है जिसमें उसकी अजीबोगरीब आपबीती लिखी है। युवती के इस दावे ने हरिद्वार में सनसनी फैला रखी है। बहरहाल पुलिस युवती को अर्धवि...