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10 दिन मे पासपोर्ट (Passport) बनाने का आसान तरीका (हिन्दी मे)

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मात्र 10 दिन में बन जाएगा आपका PASSPORT, ये है नया तरीका---- आइये, जानते हैं क्या है पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन का प्रॉसेस... स्टेप-1- पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें सबसे पहले पासपोर्ट सेवा पोर्टल की वेबसाइट मे जाने के लिए यहाँ किलिक करे  पर जाएं। पेज पर register now के लिंक पर क्लिक करें। रजिस्टर करें। इसमें अपनी डिटेल्स भरें। इसके बाद आपको ई-मेल आईडी पर लॉगिन आईडी मिल जाएगी। वापस होम पेज पर जाएं। स्टेप-2- लॉगिन करें ई-मेल पर आए लिंक पर क्लिक करके अपने अकाउंट को एक्टिवेट करें। यूजर आईडी भरें और फिर पासवर्ड डालें। अप्लाई फॉर फ्रेश पासपोर्स (Apply For Fresh Passport) या री-इश्यू ऑफ पासपोर्ट लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद दो पार्ट हैं। ऑनलाइन पासपोर्ट आवेदन करने के लिए दूसरे ऑप्शन पर क्लिक करें। स्टेप-3- विकल्प चुनें पहली बार पासपोर्ट आवेदन के लिए अप्लाई फॉर फ्रेश पासपोर्ट (Apply For Fresh Passport) पर क्लिक करें। अप्लाई करने के बाद आपके सामने फॉर्म खुलकर आएंगे। इसमें जानकारी मांगी जाएगी। फॉर्म को सही से भरें। ध्यान रहे कि फॉर्म भरने में गलती न हो, क्योंकि एक बार पासपोर...

गरीब की आग

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उस आदमी का घर जल रहा था। वह अपने परिवार सहित आग बुझाने का प्रयास कर रहा था लेकिन आग प्रचंड थी।बुझने का नाम न लेती थी। ऐसा लगता है जैसे शताब्दियों से लगी आग है, या किसी तेल के कुएं में माचिस लगा दी गई है या कोई ज्वालामुखी फट पड़ा है। आदमी ने अपनी पत्नी से कहा, "इस तरह की आगतोहमनेकभी नहीं देखी थी।" पत्नी बोली, "हां क्योंकि इस तरह की आग तो हमारे पेट में लगा करती है। हम उसे देख नहीं पाते थे।" वे आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे कि दो पढ़े-लिखे वहां आ पहुंचे। आदमी ने उनसे कहा, "भाई हमारी मदद करो।" दोनों ने आग देखी और डर गए। बोले, "देखो, हम बुद्धिजीवी हैं, लेखक हैं, पत्रकार हैं, हम तुम्हारी आग के बारे में जाकर लिखते हैं।" वे दोनों चले गए। कुछ देर बाद वहां एक आदमी और आया। उससे भी इस आदमी ने आग बुझाने की बात कही। वह बोला, "ऐसी आग तो मैंने कभी नहीं देखी… इसको जानने और पता लगाने के लिए शोध करना पड़ेगा। मैं अपनी शोध सामग्री लेकर आता हूं, तब तक तुम ये आग न बुझने देना।"वह चला गया। आदमी और उसका परिवार फिर आग बुझाने में जुट गए। पर आग थी कि काबू में ही न आ...

भूत ने छात्रा को किया प्रेगनेंट, पैदा हुए जुड़वा बच्चे फिर..

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देहरादून। आस्था की नगरी हरिद्वार में एक भूत ने बवाल मचा रखा है। भूत का दिल एक 26 साल की युवती पर आ गया। भूत युवती की ओर इस कदर पागल हुआ कि रात के वक्त युवती के घर पहुंच गया। इतना ही नहीं रात के वक्त भूत ने छात्रा के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए। युवती प्रेगनेंट हुई.. नौ माह बाद उसने जुड़वा बच्चों को जन्म भी दिया। अब भूत बच्चों को लेकर फरार है। यह किस्सा सुनकर सब चकराए हुए हैं। भूत द्वारा प्रेगनेंट किए जाने का दावा करने वाली छात्रा उत्तराखंड की रहने वाली है। युवती की कही एक भी बात पर कोई विश्वास करने को तैयार नहीं है। मामला सामने तब आया जब युवती पुलिस थाने पहुंच गई और पुलिसकर्मियों से चीख-चीख कर अपने बच्चों को खोजने की गुहार लगाने लगी। संबंधित थाने की पुलिस के अनुसार यह युवती पढ़ी-लिखी है और अग्रेंजी फर्राटेदार बोलती है। युवती ने यह भी बताया कि वो इंजीनियरिंग की छात्रा भी है। युवती के पास एक डायरी भी है। पुलिस ने बताया कि युवती ने उसकी एक डायरी भी गुम हो जाने की बात कही है जिसमें उसकी अजीबोगरीब आपबीती लिखी है। युवती के इस दावे ने हरिद्वार में सनसनी फैला रखी है। बहरहाल पुलिस युवती को अर्धवि...

गूंजती आवाजों का रहस्य (भूत की कहानी )

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मेरा नाम रामा मूर्ति है, मैं दक्षिण भारत के कुन्नूर जिले का रहने वाला हूँ और अपने अंकल से मिलने कोट्टायम आया था। वैसे मैं भूत-प्रेत में विश्वास नहीं करता लेकिन उस दिन जो मेरे साथ हुआ था, उसे देखकर मैं इस किस्से को आपके सामने रखना चाहता हूँ। उस रात वहाँ पर हम परिवार के पाँच सदस्य मैं, मेरी दादी-अम्मा, चाचा-चाची और मेरा चचेरा भाई थे और मैं सोफे पर लेट कर दादी से बात कर रहा था और चाचा, चाची और मेरा चचेरा भाई ऊपरी माले पर बने कमरे में सो रहे थे। रात के गयारह बजे होंगे कि तभी मैंने अचानक देखा कि किसी ने गैलरी की रोशनी बन्द कर दी। जिस कमरे में हम बैठे थे वो गैलरी से थोड़ी दूरी पर था और मुझे वहाँ से गैलरी में कुछ नहीं दिख रहा था। यह सुनिश्चित करने के लिए मैंने अपने चचेरे भाई ‘कृष्णा’ को आवाज़ दी और दूसरी तरफ मुझे ‘हाँ’ की आवाज़ सुनाई दी। मैं चौंक गया कि वो वहाँ कैसे पहुँच गया क्योंकि उस गैलरी तक सिर्फ हमारे कमरे से ही जाने का रास्ता है। मैंने फिर से तेज आवाज में उसका नाम पुकारा और इस बार भी वही आवाज़ दुगनी तेज सुनाई दी। जब मैंने इसे बार बार सुना तो मैंने बिना डरे उस अंधेरी गैलरी में जाने का सोचा ...

दृष्टि भेद (Eye Movements: Drusti Bheda) भरतनाट्यम ,वीडियो के साथ

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संस्कृत शब्द दृष्टि का अर्थ 'देखने ' दृष्टि से है यह हमारी आंखोंके संबंध में है जिसका प्रयोग देखने से होता है ।आँख का मटकाना या आंदोलित करना होता है जिसमे आंखो के अंदर के काले गोले को तरह तरह से मटका कर डांस मे भाव की अभिव्यक्ति करते है। वैसे इन का प्रयोग हम सभी अपनी दिनचर्या मे करते रहते है। शास्त्रों के अनुसार नेत्र आंदोलनों के आठ प्रकार के होते हैं: 1. समा: नेत्र किसी भी आंदोलन के बिना साधारण तरीके से रखते है। 2. आलोकिता: इसमे आंखो को चारों और गोल धूमते है। 3. साची: आँखों के कोने के माध्यम से या तिरछा देखते हैं। 4. प्रलोकिता : इस तरफ से उस तरफ तक तिरछा देखते है। 5. निमीलित: इसमे आंखो को आधा बंद करते है । ये एक प्रकार से ध्यानावस्था या प्रेम भाव दिखने के लिए नृत्य मे प्रयोग करते है। 6. उललोकिता: ऊपर की ओर देखते हैं। 7. अनुवृत्ता: ऊपर और नीचे आंखों की तीव्र आंदोलनकरना । 8. अवलोकिता: नीचे देखते है । श्लोक: समम  अलोकितम  साची  प्रलोकिता  निमिलिटी उललोकिता-अनुवृत्ति  चा तथा चैव -अवलोकितम इत्याष्ठो  दृष्टि  भेदः  स्यु  कीर्तितः  देख।

क्या इस धरती को बने सिर्फ 2014 साल बीते हैं ?

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मित्रो सभी लोग देखा-देखी 2015 new year की बधाइयाँ दे रहे है ! अर्थात 2014 साल बीत गए 2015 शुरू हो गया ? लेकिन 2014 साल किसके बीत गए ? 2014 साल पहले क्या था ? क्या इस धरती को बने सिर्फ 2014 साल बीते हैं ? दरअसल 2014 साल पहले ईसाई धर्म की शुरुवात हुई थी और क्योंकि अंग्रेज़ो ने भारत को 250 साल गुलाम बनाया था इसीलिए आज ये उनही का कैलंडर हमारे देश चल रहा है ! जबकि हम हिन्दू (सनातनी ) तो जब से से धरती बनी है तब से है ! _____________________________ खैर आप आते है मुख्य बात पर ! क्या सच मे 2015 आ गया ?? 2015 तो क्या भी तो 2014 भी नहीं आया !! मित्रो आपने थोड़ा भी विज्ञान पढ़ा हो तो ये बात झट से आपके समझ मे आ जाएगी !! की 2015 आया ही नहीं बल्कि 2014 भी नहीं आया !! आइए अब मुख्य बिन्दु पर आते हैं ! पहले ये जानना होगा कि एक वर्ष पूरा कब होता है ??? और क्यों होता है ??? एक वर्ष 365 दिन का क्यों होता है ?? और एक दिन 24 घंटे का ही क्यों होता है ?? तो पहले बात करते हैं 1 दिन 24 घंटे का क्यों होता है ? तो मित्रो आपने पढ़ा होगा की हमारी जो धरती है ये अन्य ग्रहों की भांति सूर्य के चारों और घूम रही है !! और चार...

शिरोभेद, सिर या शीश को मटकाना या आंदोलित करना ( Head movements , Shirobheda) with video

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सिर या शीश को मटकाना या आंदोलित करना शिरोभेद कहा जाता है। ये संस्कृत शब्द है।एक विशेषता भाव व्यक्त करते हुए सिर को मटकाना या आंदोलित करना । ये नौ प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार से है। 1.समा: सिर को सीधा रखा २.ऊद्वहितम : सिर के ऊपर की तरफ देख रहे हैं 3.अधोमुखं: नीचे देख 4.अलोलितम् : सिर के परिपत्र आंदोलन 5.धुतम् : ठीक सिर के बाईं आंदोलन करने के लिए 6.कम्पितम् : ऊपर और सिर के नीचे मंजूरी 7.परावृत्तम् : सही है या छोड़ दिया करने के लिए सिर के तेज मोड़ 8.उक्षिप्तम् : सिर दिया और उठाया या सिर के एक झुका हुआ स्थिति है। 9.परिवाहित्तम : सिर के त्वरित छोटे हिलाता है। श्लोक: समा उद्वाहितम्  अधोमुख-ललितम्  धुतम् कम्पितम्  चा परावृत्तम्  उक्षिप्तम्  परिवाहितम् नवधाकथितम्  शिरसा  नाट्यशास्त्र  विशारदेही । नीचे दिए  वीडियो में शिरोभेद को देख सकेंगे।