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चीजों को बर्वाद ना करें और अपने छोटे छोटे प्रयत्नों से इस धरा को सुरक्षित बनाये

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भगवान् बुद्ध क एक अनुयायी ने कहा , ” प्रभु ! मुझे आपसे एक निवेदन करना है .” बुद्ध: बताओ क्या कहना है ? अनुयायी: मेरे वस्त्र पुराने हो चुके हैं . अब ये पहनने लायक नहीं रहे . कृपया मुझे नए वस्त्र देने का कष्ट करें ! बुद्ध ने अनुयायी के वस्त्र देखे , वे सचमुच बिलकुल जीर्ण हो चुके थे और जगह जगह से घिस चुके थे …इसलिए उन्होंने एक अन्य अनुयायी को नए वस्त्र देने का आदेश दे दिए. कुछ दिनों बाद बुद्ध अनुयायी के घर पहुंचे . बुद्ध : क्या तुम अपने नए वस्त्रों में आराम से हो ? तुम्हे और कुछ तो नहीं चाहिए ? अनुयायी: धन्यवाद प्रभु . मैं इन वस्त्रों में बिलकुल आराम से हूँ और मुझे और कुछ नहीं चाहिए . बुद्ध: अब जबकि तुम्हारे पास नए वस्त्र हैं तो तुमने पुराने वस्त्रों का क्या किया ? अनुयायी: मैं अब उसे ओढने के लिए प्रयोग कर रहा हूँ ? बुद्ध: तो तुमने अपनी पुरानी ओढ़नी का क्या किया ? अनुयायी: जी मैंने उसे खिड़की पर परदे की जगह लगा दिया है . बुद्ध: तो क्या तुमने पुराने परदे फ़ेंक दिए ? अनुयायी: जी नहीं , मैंने उसके चार टुकड़े किये और उनका प्रयोग रसोई में गरम पतीलों को आग से उतारने के लिए कर रहा ...

शहतूत -

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यह मूलतः चीन में पाया जाता है | यह साधारणतया जापान ,नेपाल,पाकिस्तान,बलूचिस्तान ,अफगानिस्तान  ,श्रीलंका,वियतनाम तथा सिंधु के उत्तरी भागों में पाया जाता है | भारत में यह  पंजाब,कश्मीर,उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश एवं उत्तरी पश्चिमी हिमालय में पाया जाता है |  इसकी दो प्रजातियां पायी जाती हैं | १- तूत (शहतूत) २-  तूतड़ी |  इसके फल लगभग २.५ सेंटीमीटर लम्बे,अंडाकार अथवा लगभग गोलाकार ,श्वेत अथवा पक्वावस्था में  लगभग हरिताभ-कृष्ण अथवा गहरे बैंगनी वर्ण के होते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जनवरी से जून तक  होता है | इसके फल में प्रोटीन,वसा,कार्बोहायड्रेट,खनिज,कैल्शियम,फॉस्फोरस,कैरोटीन ,विटामिन A ,B एवं  C,पेक्टिन,सिट्रिक अम्ल एवं मैलिक अम्ल पाया जाता है |आज हम आपको शहतूत के औषधीय गुणों से  अवगत कराएंगे - १- शहतूत के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारे करने से गले के दर्द में आराम होता है । २- यदि मुँह में छाले हों तो शहतूत के पत्ते चबाने से लाभ होता है | ३- शहतूत के फलों का सेवन करने से गले की सूजन ठीक होती है | ४- पांच - दस मिली शहतूत फल स्वरस का सेवन करने से जलन,अज...

शनि पर तेल चढ़ाने से नहीं होती है पैसों की कमी......

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हर शनिवार काफी लोग शनि को तेल अर्पित करते हैं। शनि को तेल अर्पित करने वाले अधिकांश लोग इस काम को सिर्फ प्राचीन परंपरा मानते हैं और वे यही सोचते हैं कि ऐसा करने पर शनि की कृपा प्राप्त होती है। इस परंपरा के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व की कई बातें छिपी हुई हैं, जिन्हें काफी कम लोग जानते हैं। शनि को तेल अर्पित करते समय ध्यान रखें ये बातें --------------------- अक्सर हर शनिवार को बाजार में या हमारे घर के आसपास शनि प्रतिमा को लिए हुए कुछ लोग दिखाई देते हैं। वे किसी बाल्टी में या किसी अन्य बर्तन में शनि प्रतिमा को रखते हैं और लोग उस पर तेल अर्पित करते हैं। प्रतिमा पर तेल अर्पित करते समय इच्छा अनुसार धन का दान भी करना चाहिए। साथ ही, साफ-सफाई और पवित्रता का भी ध्यान रखें। तेल चढ़ाने से पहले तेल में अपना चेहरा अवश्य देखें। ऐसा करने पर शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है। धन संबंधी कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है। शनि पर तेल चढ़ाने से जुड़ी वैज्ञानिक मान्यता --------------------- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर के सभी अंगों में अलग-...

कुछ नुस्खे : लहसुन के बड़े फायदे .

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लहसुन सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के लिए एक औषधी की तरह भी काम करता है.  इसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज, लवण  और फॉस्फोरस, आयरन व विटामिन ए, बी व सी भी पाए जाते हैं.  लहसुन शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है. भोजन में किसी भी तरह  इसका सेवन करना शरीर के  लिए बेहद फायदेमंद होता है आज हम बताने जा रहे हैं आपको औषधिय गुण से  भरपूर लहसुन के कुछ ऐसे  ही नुस्खों के  बारे में जो नीचे लिखी स्वास्थ्य समस्याओं में रामबाण है।  1-100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने और आठ - दस लहसुन की कुली  डालकर धीमी - धीमी आंच पर पकाएं. जब  लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर  छान लें और बोतल में भर दें. इस तेल को गुनगुना कर इसकी मालिश करने से हर  प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है।  2 -. लहसुन की एक कली छीलकर सुबह एक गिलास पानी से निगल लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर  नियंत्रित रहता है साथ ही ब्लडप्रेशर भी  कंट्रोल में रहता है।  3 - लहसुन डायबिटीज के रोगियो...

जाने ब्रह्म मुहूर्त के वैज्ञानिक लाभ

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ब्रह्म मुहूर्त का ही विशेष महत्व क्यों? रात्रि के अंतिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिए सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घण्टे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में ही जग जाना चाहिये। इस समय सोना शास्त्र निषिद्ध है। “ब्रह्ममुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी”। (ब्रह्ममुहूर्त की पुण्य का नाश करने वाली होती है।) ब्रह्म मुहूर्त का विशेष महत्व बताने के पीछे हमारे विद्वानों की वैज्ञानिक सोच निहित थी। वैज्ञानिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि ब्रह्म मुहुर्त में वायु मंडल प्रदूषण रहित होता है। इसी समय वायु मंडल में ऑक्सीजन (प्राण वायु) की मात्रा सबसे अधिक (41 प्रतिशत) होती है, जो फेफड़ों की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती है। शुद्ध वायु मिलने से मन, मस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है। आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर टहलने से शरीर में संजीवनी शक्ति का संचार होता है। यही कारण है कि इस समय बहने वाली वायु को अमृततुल...

हिन्दू विवाह मे क्या है 7 वचन महत्व

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सात फेरो के 7 वचन- वैदिक संस्कृति के अनुसार सोलह संस्कारों को जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार माने जाते हैं . विवाह संस्कार उन्हीं में से एक है जिसके बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं हो सकता . हिंदू धर्म में विवाह संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है . पशुके स्तर पर न रहकर उच्चतम स्तर पर जाकर , विवाह जैसे रज - तमात्मक प्रसंग को भी सात्त्विक बनाकर , उन्हें अध्यात्म से जोडकर देवताओं के कृपाशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर हिंदु धर्म ने दिया है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है , परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म - जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता . अग्नि के सात फेरे लेकर और ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो तन , मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं . विवाह = वि + वाह , अत : इसका शाब्दिक अर्थ है - उत्तरदायित्व का वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है।  हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीर...

राजा बाज और किसान

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बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये ।वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे , और राजा ने कभी इससे प हले इतनेशानदार बाज नहीं देखे थे। राजा ने उनकी देखभाल के लिए एकअनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।                जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया , और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था। राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे । राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो । “ आदमी ने ऐसा ही किया। इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था। ये देख , राजा को कुछ अजीब लगा।  “क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”, राजा ने सवाल किया। ” जी हुजूर ,इस बा...