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Showing posts from October, 2018

सलीम अनारकली और अकबर या अकबर अनारकली और सलीम?: 20वी शताब्दी की कल्पना, 16वी शताब्दी का कलुषित सत्य?

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सलीम अनारकली और अकबर या अकबर अनारकली और सलीम?: 20वी शताब्दी की कल्पना, 16वी शताब्दी का कलुषित सत्य? *********************************************** आज सलीम अनारकली, एक मुगल शहजादे सलीम, जो बाद में बादशाह जहांगीर बना और महल की बांदी अनारकली के मुहब्बत की कहानी की कहानी कौन नही जानता है? ये मुहब्बत ऐसी थी की अनारकली के लिये सलीम ने मुगल बादशाह अकबर के विरुद्ध विद्रोह तक कर दिया था और उसकी कीमत अनारकली ने दीवार में चुनवा कर दी थी। यह एक और बात है कि अकबर बड़ा महान और न्यायप्रिय था, उसने अनारकली की माँ को दिये वचन की लाज रखते हुये अनारकली को चोर रास्ते से जिंदा निकलवा दिया था। आज भारत की कॉकटेल पीढ़ी के लिये यही इतिहास है जो 1962 में के. आसिफ की फ़िल्म 'मुगल-ए-आजम' द्वारा स्थापित किया गया था। यह एक ऐसा इतिहास है, जो खुद इतिहास में नही है। इस अनारकली का जिक्र न अकबर के शासनकाल पर लिखित अबुल फजल की 'अकबरनामा' में है और न जहांगीर की 'ताज़ाक़-ए-जहाँगीरी' में है, जो उसके 1605 से 1622 के शासनकाल का वर्णन करती है। फिर सवाल यह पैदा होता है कि यह के. आसिफ की अनारकली आयी कहाँ से औ...

शिव और शक्ति दो त्रिभुज मिल के बने षटकोण

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यहूदियों का रिलीजियस सिंबल 'सिक्स पॉइंटेड स्टार'! .. हिंदी में बोले तो 'षटकोण' ! .. यहूदी लोग इसे 'स्टार ऑफ डेविड' कहते है।और पूरी दुनिया में भी अब ये इसी नाम से जाना जाता है। डेविड यूनाइटेड किंगडम ऑफ इजरायल एंड जुडाह का सेकंड किंग होता है। इनका शासनकाल 1010-970 BCE होता है। ये यहूदियों के लिए बहुत ही यशस्वी और प्रतापी राजा होता है। और इन्हीं के नाम ये 'सिक्स पॉइंटेड स्टार' का नाम रखा गया है याने कि 'स्टार ऑफ डेविड'। इस स्टार का यहूदियों में चलन 3री से 4थी शताब्दी में ज्यादा होने लगा। इससे पहले बहुत कम था। लेकिन जब ये आम व्यवहार में आया तो इनका नाम किंग डेविड पे रखा गया। और आज हालत ये है कि इसे 'स्टार ऑफ डेविड' के ही नाम से जाना जाता है। और इसका महत्व कुछ इस प्रकार है कि ये 'स्टार ऑफ डेविड' इजरायल के राष्ट्रीय झंडे में भी स्थान पाया हुआ है। लेकिन इस डेविड के स्टार की जरा और खोजबीन करते हैं। डेविड तो हुए ईसा पूर्व 1000 के आस पास के। लेकिन क्या इनके पूर्व इस स्टार का चलन अन्य जगह नहीं था ?? किन्हीं अन्य सभ्यता में इसकी मौजूदगी नहीं ...

अंतरिक्ष की आवाजो की वास्तविकता

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400 ईसा पूर्व डेमोक्रेटिस ने एक सिद्धान्त दिया कि सभी वस्तुएँ एटम से बनी है और एटम ब्रह्मांड में पाया जाने वाला सबसे छोटा तत्व है इसे तोड़ कर और छोटा नही किया जा सकता... सर अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने आगे चलकर इस थ्योरी को सही साबित किया... सन 1807 में जे जे थॉमसन ने अणु में इलेक्ट्रॉन के होने के सबूत जुटाए और फिर न्यूक्लियस की खोज के बाद विज्ञान ने हमे बताया की न्यूक्लियस भी प्रोटोन और न्यूट्रॉन से बने होते है... ये अंतिम थ्योरी थी, विज्ञान ने ये दावा किया कि इन इकाइयों को इससे ज्यादा नही तोड़ा जा सकता लेकिन फिर 1970 में क्वार्क्स की खोज हुई और विज्ञान ने हमे फिर बताया कि न्यूट्रॉन और प्रोटॉन क्वार्क्स के संयोजन से बने होते है... फिर पृथ्वी पर फोर्सेज ऑफ नेचर की खोज करने वाले माइकल फैराडे ने ब्रह्मांड की फील्ड की खोज की... ब्रह्मांड की फील्ड को क्वांटम फील्ड कहा गया... और क्वांटम फिज़िसियस्ट ने एक नई थ्योरी पेश की... एटम, न्यूक्लियस, प्रोटोन, न्यूट्रॉन और इनके सब-पार्टिकल असल में सॉलिड पार्टिकल है ही नही, बल्कि ये सब वेव यानी तरंग है जो बनते है क्वांटम फील्ड में होने वाले वाइब्रेशन की वजह से......